सुप्रीम कोर्ट प्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स: सोशल मीडिया
महाराष्ट्र

शराबबंदी से बढ़ता है जहर का व्यापार! सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र का पुराना नियम रद्द कर कही यह बात

Supreme Court on Illicit Liquor: सुप्रीम कोर्ट ने जहरीली शराब त्रासदियों को रोकने के लिए राज्यों को कार्रवाई के निर्देश दिए। महाराष्ट्र विष नियमावली के कड़वाहट और रंग मिलाने वाले नियम को रद्द कर दिया।

आकाश मसने

Supreme Court on Maharashtra Methanol Rules: देशभर में अवैध और जहरीली शराब से होने वाली मौतों और त्रासदियों पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे अवैध शराब के उत्पादन, परिवहन और बिक्री को पूरी तरह से रोकने के लिए पुलिस, आबकारी, परिवहन और उद्योग विभागों के बीच बेहतर तालमेल और समन्वित रणनीति अपनाएं।

महाराष्ट्र विष नियमावली के नियम 18ए और 18बी रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र जहर (नियंत्रण) नियमावली में 2011 की अधिसूचना के जरिए जोड़े गए नियम 18ए और 18बी को रद्द कर दिया है। इन नियमों के तहत गैर-दवा निर्माताओं के लिए मेथनॉल बेचने से पहले उसमें खास रंग और कड़वा स्वाद मिलाना अनिवार्य किया गया था, ताकि लोग इसे शराब समझकर न पीएं। अदालत ने स्पष्ट किया कि ये पाबंदियां संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 19(1)(जी) का उल्लंघन करती हैं।

1991 की मुंबई त्रासदी का जिक्र

अदालत ने मुंबई के अंधेरी स्थित छाया बार की 1991 की भीषण त्रासदी का उल्लेख किया, जहां जहरीली शराब पीने से दर्जनों लोगों की जान चली गई थी। फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति पारदीवाला ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जिन लोगों ने शराब पी थी, उन्हें यह मालूम ही नहीं था कि वे मेथनॉल पी रहे हैं, जो एक खतरनाक जहर है। नतीजतन, लगभग 93 लोगों की जान चली गई।

अदालत ने कहा कि मेथनॉल में कड़वाहट या रंग मिलाने से पीने की लत खत्म नहीं होगी। इसे आसानी से मिलने से रोकने के लिए, कानूनों के तहत परिवहन और भंडारण के लिए सख्त नियम होने चाहिए। मौजूदा कदम पूरे उद्योग को ही खतरे में डाल देगा और इससे असल मकसद ही पीछे छूट जाएगा।

शराबबंदी और अवैध कारोबार पर कोर्ट का रुख

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र विष नियमावली के नियम 18ए और 18बी को रद्द करते हुए कहा कि शराब पर पूर्ण प्रतिबंध से कई बार अवैध कारोबार बढ़ सकता है और बिना नियमन वाली जहरीली शराब का खतरा पैदा हो सकता है।

राज्यों के लिए मुख्य दिशा-निर्देश

  • मेथनॉल की निगरानी: उद्योग विभाग रसायनों और मेथनॉल की खरीद-बिक्री तथा इस्तेमाल पर सख्त नजर रखे।

  • सख्त लाइसेंसिंग: परमिट और लाइसेंस व्यवस्था की नियमित समीक्षा हो तथा नियमों के उल्लंघन पर तुरंत लाइसेंस रद्द किए जाएं।

  • सप्लाई चेन पर चोट: सीमाओं पर चेकिंग बढ़ाई जाए और अवैध शराब बनाने वाले स्थानीय ठिकानों की पहचान कर पुलिस-आबकारी विभाग मिलकर कार्रवाई करें।

DUSU Election Result 2026 LIVE: वोटों की गिनती जारी, ABVP-NSUI में कांटे की टक्कर; हर अपडेट यहां

PM नरेंद्र मोदी ने 51,000 से ज्यादा युवाओं को सौंपे नियुक्ति पत्र, बोले- FTA से खुल रहे करियर के नए अवसर

तीन कंपनियों में सेंधमारी की Google Gemini, टेस्ट के दौरान चौकाने वाले दावे

उधमपुर के जंगल में छिपे जैश के 6 आतंकी! खून से सने पैरों के मिले निशान, सुरक्षा बलों ने 2 को किया ढेर

पेंशन, प्यार और पुलिस... 70 साल के दादाजी का यंग महिला दोस्त पर आया दिल! परेशान दादी ने दर्ज कराई FIR