Sharad Pawar And Devendra Fadnavis (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम) 
पुणे

Sharad Pawar vs Fadnavis: 'उन्हें मेरा नाम लेने का क्या अधिकार?', मुख्यमंत्री पर भड़के शरद पवार

Sharad Pawar On Fadnavis: शरद पवार ने स्पष्ट किया है कि एनसीपी विलय की चर्चाओं में वे शामिल नहीं थे और देवेंद्र फडणवीस को इस मुद्दे पर उनका नाम लेने का कोई अधिकार नहीं है।

अनिल सिंह

NCP Merger Row: महाराष्ट्र की राजनीति में उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असामयिक निधन के बाद पैदा हुआ 'विलीनीकरण' (Merger) का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ जहाँ चर्चाएं थीं कि अजित पवार की एनसीपी का विलय शरद पवार की एनसीपी (SP) में होने वाला था, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा इस पर दिए गए बयानों ने आग में घी डालने का काम किया है। अब खुद एनसीपी-एसपी प्रमुख शरद पवार ने इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ी है और देवेंद्र फडणवीस पर तीखा हमला बोला है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पवार ने दो टूक कहा कि फडणवीस को इस मामले में उनका नाम खींचने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

पवार की यह प्रतिक्रिया उस समय आई है जब मुख्यमंत्री फडणवीस ने हाल ही में कहा था कि यदि विलय जैसा कोई बड़ा फैसला होने वाला होता, तो अजित पवार उन्हें जरूर बताते। फडणवीस के इस दावे को शरद पवार ने सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस पूरी प्रक्रिया और चर्चा के समीकरणों से उनका सीधा संबंध नहीं था। पवार ने साफ किया कि फडणवीस का इस विषय में उनके नाम का उल्लेख करना पूरी तरह अनुचित है।

जयंत पाटील और अजित पवार के बीच क्या हुई थी बात?

शरद पवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विलय की खबरों की हकीकत से पर्दा उठाया। उन्होंने बताया, "देवेंद्र फडणवीस को मेरा नाम लेने का क्या अधिकार है? मैं इस चर्चा का हिस्सा ही नहीं था।" पवार ने खुलासा किया कि बातचीत का सिलसिला उनके प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटील और भतीजे अजित पवार के बीच चल रहा था। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनके बीच जो भी संवाद हुआ, उसमें किसी भी तरह की "राजनीतिक सौदेबाजी" या विलीनीकरण जैसी ठोस बातचीत शामिल नहीं थी। पवार का यह बयान उन दावों को कमजोर करता है जिनमें 12 फरवरी को विलय की घोषणा की बात कही जा रही थी।

58 वर्षों के संसदीय करियर में पहली बार सदन से दूरी

राजनीतिक मुद्दों के अलावा शरद पवार इस दौरान काफी भावुक भी नजर आए। उन्होंने अपनी संसदीय यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि वे पिछले 58 वर्षों से महाराष्ट्र विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा से जुड़े हुए हैं। उन्होंने गर्व के साथ साझा किया कि इन पांच दशकों से अधिक के समय में वे कभी भी सदन की कार्यवाही या बजट सत्र से अनुपस्थित नहीं रहे। पवार ने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अजित पवार के निधन जैसी घटना के कारण इस बार मैं सदन में उपस्थित होकर बजट नहीं सुन सका।" हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि उनकी अनुपस्थिति के बावजूद सदन में कुछ संतोषजनक फैसले लिए गए हैं।

सुनेत्रा पवार और भविष्य की राजनीति

अजित पवार के निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल ली है। शरद पवार ने इस बदलाव और आगामी चुनावों पर भी अपने विचार रखे। राजनीति के जानकारों का मानना है कि भले ही पवार विलय की खबरों को फिलहाल नकार रहे हों, लेकिन जयंत पाटील और अजित पवार के बीच हुई गुप्त मुलाकातों ने भविष्य की नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। अब देखना यह है कि क्या 11 फरवरी को मेयर चुनाव और उसके बाद के राजनीतिक घटनाक्रम शरद पवार के रुख को बदलते हैं या वे महा विकास अघाड़ी (MVA) को और मजबूत करने पर ही ध्यान केंद्रित रखेंगे।

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