पुणे वॉटर क्राइसिस टैंकर सप्लाई (सौ. फाइल फोटो ) 
पुणे

Pune में टैंकर हड़ताल से जल संकट गहराया, हजारों परिवार पानी के लिए परेशान

Tanker Operators Protest Pune: पुणे में टैंकर चालकों की हड़ताल से जल संकट गहरा गया है। कई इलाकों में पानी की सप्लाई ठप है, जिससे हजारों परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

अपूर्वा नायक

Pune Water Crisis Tanker Strike: पुणे इस समय भीषण गर्मी के साथ-साथ एक गंभीर जल संकट के मुहाने पर खड़ी है। शहर के टैंकर व्यवसायियों ने खुद पर लगे 'टैंकर माफिया' के कलंक और प्रशासन की कथित भेदभावपूर्ण नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

बुधवार, 15 अप्रैल से कोंढवा, महमदवाडी, उंड्री और एनआईबीएम रोड जैसे तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में पानी के टैंकरों के पहिए पूरी तरह थम गए हैं। इन क्षेत्रों में रहने वाले हजारों परिवार अब बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, क्योंकि यहां की अधिकांश हाउसिंग सोसायटियां अपनी दैनिक जरूरतों के लिए पूरी तरह निजी टैंकरों पर निर्भर हैं।

बदले में मिल रही बदनामी और दंडात्मक कार्रवाई

टैंकर मालिकों के प्रतिनिधियों सुशांत लोणकर, रविकांत घुले और सुनील घुले ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि टैंकर व्यवसायियों को समाज और प्रशासन की नजरों में खलनायक बनाकर पेश किया जा रहा है।

उनका तर्क है कि पुणे मनपा नए शहरी क्षेत्रों और बड़ी सोसायटियों को बुनियादी सुविधाएं, विशेषकर पानी उपलब्ध कराने में पूरी तरह विफल रही है। ऐसे में टैंकर व्यवसायी अपनी गाड़ियों के जरिए नागरिकों की प्यास बुझाकर एक अनिवार्य सेवा प्रदान कर रहे हैं, लेकिन बदले में उन्हें केवल बदनामी और दंडात्मक कार्रवाई मिल रही है।

Pune में पानी की वास्तविक खपत 22 टीएमसी तक पहुंची

इन प्रतिनिधियों ने बताया कि शहर के लिए सरकारी तौर पर लगभग 14 टीएमसी पानी मंजूर है, लेकिन आबादी और भौगोलिक विस्तार को देखते हुए वास्तविक खपत 22 टीएमसी हो गई है। यह सीधा 8 टीएमसी का अंतर निजी टैंकरों के माध्यम से ही पूरा किया जाता है। प्रशासन अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए टैंकरचालकों पर 'माफिया' का लेबल लगा रहा है।

हाल ही में हुई कुछ सड़क दुर्घटनाओं का ठीकरा भी हम लोगों पर फोड़ा जा रहा है, जबकि सड़कों की जर्जर स्थिति और लचर यातायात प्रबंधन पर कोई व्यान नहीं दिया जा रहा है। व्यवसायियों की हड़ताल का एक मुख्य कारण बढ़ता आर्थिक बोझ और आरटीओ की नीतियां भी हैं।

पिछले दो महीनों से आरटीओ द्वारा वाहनों की पासिंग प्रक्रिया बंद होने के कारण सैकड़ों टैंकर सड़क पर नहीं उतर पा रहे हैं। Pune यातायात पुलिस द्वारा वैध दस्तावेज होने के बावजूद गाड़ियों को जब्त करना और मनमाना जुर्माना वसूलना आम बात हो गई है।

प्रशासन ने अब प्रत्येक टैंकर के साथ एक हेल्पर (सहायक) रखना अनिवार्य कर दिया है, जिससे संचालन लागत में भारी वृद्धि हुई है। एक ट्रिप पर अब लगभग 1500 रुपये का अतिरिक्त खर्च आ रहा है, जबकि मुनाफा घटकर मात्र 500 से 600 रुपये रह गया है।

'स्मार्ट सिटी पुणे' में उन्हें तीसरी बार इस भीषण जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। टैंकरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने स्थिति को भयावह बना दिया है और अब घरों में पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप है। नागरिक नियमित रूप से जल कर (पानी पट्टी) भर रहे हैं, फिर भी प्रशासन पानी देने में असमर्थ है। -ए जे खान, पूर्व मुख्य आयकर आयुक्त

शहर में जारी टैंकर चालको की हड़ताल और कुछ तकनीकी कारणों के चलते गुरुवार का प्रस्तावित जलापूर्ति बंद (क्लोजर) को स्थगित कर दिया गया है। इसकी नई तारीख जल्द घोषित की जाएगी। ऐसे में पुणे शहर में पानी की आपूर्ति पूर्ववत जारी रहेगी। इसलिए लोगों को प्रशासन का सहयोग करना चाहिए।

- मुख्य अभियंताा, जल आपूर्ति विभाग, पुणे महानगर पालिका

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