रोहिणी खड़से (सोर्स: डिजाइन फोटो) 
पुणे

156 हिरासत में तो सिर्फ 78 पर ही एक्शन क्यों? पुणे रेव पार्टी कांड में NCP नेता रोहिणी खड़से का पुलिस पर हमला

Pune Tulapur Rave Party Raid: पुणे रेव पार्टी छापेमारी में बड़ा मोड़! NCP नेता रोहिणी खड़से का आरोप 156 में से सिर्फ 78 पर कार्रवाई क्यों? क्या पुलिस प्रभावशाली लोगों के बच्चों को बचा रही है?

गोरक्ष पोफली

Rohini Khadse Allegations Pune Police: पुणे के तुलापुर क्षेत्र में हाल ही में हुई एक हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट X रेव पार्टी पर पुलिस की छापेमारी ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है, जिसमें पुलिस की कार्यप्रणाली और राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लग रहे हैं। इस जांच को लेकर विपक्षी नेता सुषमा अंधारे और एडवोकेट रोहिणी खड़से ने पुलिस की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

छापेमारी और बरामदगी की घटना

पुणे क्राइम ब्रांच ने एक गुप्त सूचना के आधार पर तुलापुर के एक रिसॉर्ट बंगले में रविवार तड़के लगभग 2:30 बजे छापा मारा। इस कार्रवाई में पुलिस ने 156 लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें 107 पुरुष, 49 महिलाएं और तीन नाबालिग शामिल थे। पुलिस ने मौके से करीब 85 लाख रुपये की सामग्री जब्त की, जिसमें 9.22 लाख रुपये की शराब, तीन ग्राम गांजा और प्रतिबंधित हुक्का फ्लेवर बरामद किए गए। पुलिस के अनुसार, पार्टी के लिए कोई वैध अनुमति नहीं थी और शराब परोसने का समय समाप्त होने के बाद भी यह जारी थी। इस मामले में आयोजकों ब्लेज एंटरटेनमेंट के ऐमन शेख और स्टार लाइट एंटरटेनमेंट के यश चौधरी पर एनडीपीएस (NDPS) एक्ट और अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

राजनीतिक विरोध और पक्षपात के आरोप

इस जांच को लेकर विपक्षी नेताओं, विशेष रूप से शिवसेना (ठाकरे गुट) की नेता सुषमा अंधारे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की नेता एडवोकेट रोहिणी खड़से ने पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का मुख्य आरोप यह है कि 156 लोगों को हिरासत में लेने के बावजूद केवल 78 लोगों पर ही मामला दर्ज क्यों किया गया?। इसके अतिरिक्त, यह भी पूछा गया है कि केवल 29 लोगों का ही मेडिकल टेस्ट क्यों कराया गया, जबकि पार्टी में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

प्रांजल मामले से तुलना और दोहरे मापदंड

विपक्ष की नेता एडवोकेट रोहिणी खड़से ने पुलिस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने जुलाई 2025 के एकनाथ खड़से के दामाद प्रांजल खेवलकर की गिरफ्तारी का हवाला देते हुए कहा कि उस समय कम लोगों की मौजूदगी के बावजूद उसे रेव पार्टी का नाम दिया गया था और सभी का टेस्ट हुआ था, लेकिन वर्तमान मामले को हाउस पार्टी कहकर रईसजादों को बचाने की कोशिश की जा रही है। नेताओं ने संदेह जताया है कि जिन लोगों को छोड़ा गया, क्या वे किसी राजनेता या प्रभावशाली उद्योगपति के बच्चे हैं।

सांस्कृतिक और धार्मिक संवेदनशीलता

एक महत्वपूर्ण विवाद तुलापुर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जुड़ा है। विपक्ष ने सवाल किया है कि छत्रपति संभाजी महाराज के पवित्र स्मृति स्थल तुलापुर में, और वह भी छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक दिवस पर ऐसी पार्टी की अनुमति कैसे दी गई। पुलिस अधिकारी तेजस्वी सातपुते ने जहां एक ओर इसे अवैध बताया है, वहीं विपक्ष का दावा है कि पुलिस ने पहले एक्साइज डिपार्टमेंट की अनुमति होने की बात कही थी, जिसे अब सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है।

यह मामला केवल एक अवैध पार्टी का नहीं रह गया है, बल्कि यह कानून के समान अनुप्रयोग, पुलिस की पारदर्शिता और रसूखदार लोगों को दी जाने वाली कथित छूट पर एक बड़ी बहस बन गया है।

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