महाराष्ट्र के इन दो शहरों में रखा जाता है देश का सर्वाधिक सोना, जानें इन गोल्ड वॉल्ट्स में क्या खास है?

India Stores Gold In Maharashtra: महाराष्ट्र के मुंबई और नागपुर में रखा जाता है देश का सर्वाधिक सोना। जानिए आरबीआई ने भारत के खजाने के लिए सुरक्षा और रणनीतिक कारणों से इन शहरों को ही क्यों चुना।
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गोल्ड स्टोरेज की सांकेतिक फोटो
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India RBI Gold Vault: भारत का गोल्ड रिजर्व आज अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है और इस विशाल खजाने की सुरक्षा का केंद्र महाराष्ट्र बना हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक के पास मौजूद कुल 880.52 मीट्रिक टन सोने में से अधिकांश हिस्सा अब महाराष्ट्र के दो शहरों मुंबई और नागपुर की हाईसिक्योरिटी तिजोरियों में सुरक्षित रखा गया है। हाल के वर्षों में आरबीआई ने ब्रिटेन से अपना सोना वापस लाने की प्रक्रिया तेज कर दी है, जिससे महाराष्ट्र की इन दो शाखाओं का महत्व और भी बढ़ गया है।

कहां रखा जाता है देश का सोना?

आरबीआई अपना डोमेस्टिक गोल्ड रिजर्व मुख्य रूप से दो उच्चसुरक्षा स्थानों पर संग्रहित करता है मुंबई और नागपुर।

  • मुंबई (मिंट रोड): मुंबई में आरबीआई की पुरानी इमारत, जो मिंट रोड पर स्थित है, देश के सोने के भंडारण का एक प्रमुख केंद्र है। भारत की वित्तीय राजधानी होने के नाते, मुंबई हमेशा से इस रणनीतिक संपत्ति का मुख्य संरक्षक रहा है।
  • नागपुर (आरबीआई कार्यालय): महाराष्ट्र की उपराजधानी और भारत का भौगोलिक केंद्र कहा जाने वाला नागपुर, देश की सबसे सुरक्षित गोल्ड वॉल्ट का घर है। नागपुर स्थित आरबीआई की इस शाखा में अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली और प्रशिक्षित कमांडो की 24 घंटे निगरानी रहती है।

क्यों चुना गया महाराष्ट्र के इन दो शहरों को?

सोने के भंडारण के लिए इन स्थानों का चयन करने के पीछे गहरे रणनीतिक और ऐतिहासिक कारण हैं। 1956 में, आरबीआई ने सुरक्षा कारणों से सोने को मुंबई (जो एक तटीय शहर है) से हटाकर देश के अंदरूनी हिस्से नागपुर में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया था। नागपुर को समुद्र तट से दूर होने के कारण बाहरी आक्रमणों से अधिक सुरक्षित माना जाता है।

नागपुर 1946 से ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के स्वर्ण भंडार के लिए दुनिया के पांच प्रमुख डिपॉजिटरी में से एक रहा है। महाराष्ट्र भारत की अर्थव्यवस्था का इंजन है और देश की जीडीपी में सबसे बड़ा योगदान देता है। मुंबई का वित्तीय तंत्र और नागपुर की रणनीतिक स्थिति इसे सोने जैसे महत्वपूर्ण स्टोरेज के लिए सबसे उपयुक्त बनाती है।

विदेशों से घर लौट रहा है सोना

1991 के आर्थिक संकट के दौरान भारत को अपना सोना गिरवी रखने के लिए लंदन भेजना पड़ा था। लेकिन आज भारत की आर्थिक स्थिति बदल चुकी है। मार्च 2026 तक, भारत का 77.2% सोना (लगभग 680.05 टन) अब घरेलू तिजोरियों में वापस आ चुका है, जो मार्च 2024 में 50% से भी कम था। विशेषज्ञों के अनुसार, रूस - यूक्रेन युद्ध जैसे भूराजनीतिक तनावों के कारण पैदा हुए जोखिमों और बैंक ऑफ इंग्लैंड को दिए जाने वाले भंडारण शुल्क को बचाने के लिए आरबीआई ने अपना सोना महाराष्ट्र की इन सुरक्षित तिजोरियों में वापस लाने का फैसला किया है। आज महाराष्ट्र न केवल भारत का आर्थिक केंद्र है, बल्कि देश की वित्तीय संप्रभुता के प्रतीक गोल्ड स्टोरेज का सबसे बड़ा रक्षक भी है।

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