

Rohini Khadse Slams Gopichand Padalkar: पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर की जयंती के अवसर पर चोंडी में हुए विवाद ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की नेता अॅड. रोहिणी एकनाथराव खडसे ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने भाजपा विधायक गोपीचंद पड़लकर का नाम लिए बिना उन पर कड़ा हमला बोला और जयंती समारोह के दौरान हुए व्यवहार को महाराष्ट्र का दुर्भाग्य करार दिया है।
रोहिणी खडसे ने अहिल्यादेवी होलकर के महान कार्यों का स्मरण कराते हुए कहा कि उन्होंने अपने पति के निधन के बाद न केवल राज्य की बागडोर संभाली, बल्कि होलकर साम्राज्य का विस्तार भी किया। उन्होंने पौराणिक मंदिरों का जीर्णोद्धार कर हमारी संस्कृति को सहेजने का कार्य किया और सती जैसी कुप्रथाओं को नष्ट कर महिलाओं को समाज में सम्मान दिलाया। खडसे ने अत्यंत दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जिस महापुरुष ने महिलाओं के सम्मान के लिए जीवन समर्पित कर दिया, उन्हीं के जयंती समारोह में आज माताओं-बहनों पर अभद्र गालियां दी जा रही हैं, जो एक बड़ी त्रासदी है।
चोंडी में हुए शक्ति प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए रोहिणी खडसे ने पूछा कि क्या हमारे महापुरुषों ने ऐसे ही उत्सव की कल्पना की थी? उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जयंती अहिल्यादेवी की है, लेकिन वहां नेताओं का जुलूस निकाला जा रहा है। अहिल्यादेवी के गौरवशाली गीतों के बजाय नेताओं की स्तुति करने वाले व्यक्तिगत गाने बजाए जा रहे हैं और जमकर हुल्लड़बाजी की जा रही है। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि क्या यह आचरण उन महान विचारों के अनुरूप है जिन्हें अहिल्यादेवी ने स्थापित किया था?
सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखते हुए रोहिणी खडसे ने प्रदेश के युवाओं को एक महत्वपूर्ण सलाह दी है। उन्होंने अपील की कि युवाओं को ऐसे छपरी राजनीतिज्ञों से दस हाथ दूर रहना चाहिए। उनके अनुसार, जब युवा इन सतही और शोर-शराबे वाली राजनीति करने वाले नेताओं से दूरी बनाएंगे, तभी वे सही मायने में हमारे महापुरुषों के वास्तविक विचारों और उनके संघर्ष को समझ पाएंगे।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब विधायक गोपीचंद पडलकर के एक गाने और उनके समर्थकों द्वारा किए गए व्यवहार पर रोहित पवार ने आपत्ति जताई थी, जिसके बाद पड़लकर ने भी पलटवार किया था। अब रोहिणी खडसे के इस बयान ने इस विवाद को और अधिक गर्मा दिया है। चोंडी की इस घटना ने एक बार फिर महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति और सार्वजनिक कार्यक्रमों में बढ़ती अभद्रता पर बहस छेड़ दी है।