कोथरूड के सुतारदरा में बीडीपी जमीन पर अवैध खुदाई का मामला।
जेसीबी और पोकलेन से खुदाई, मनपा ने काम रुकवाया।
साधारण कागज पर नोटिस जारी होने से उसकी वैधता पर सवाल उठे।
Pune Kothrud BDP Hilltop Illegal Excavation: पुणे में पहाड़ियों की कटाई और जमीन की खुदाई से जुड़े मामले लगातार सामने आ रहे हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में कथित अनधिकृत निर्माण और खुदाई के खिलाफ पुणे महानगरपालिका की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ताजा मामला कोथरूड के सुतारदरा स्थित सर्वे नंबर 113 का है।
यहां बायोडायवर्सिटी पार्क (बीडीपी) और हिलटॉप-हिलस्लोप के लिए आरक्षित जमीन पर भारी मशीनों से खुदाई किए जाने की शिकायत मिली है। मनपा ने संबंधित जमीन मालिक को नोटिस जारी कर काम रुकवा दिया है, लेकिन नोटिस का प्रारूप ही अब चर्चा का विषय बन गया है।
स्थानीय नागरिकों ने सुतारदरा परिसर में बड़े पैमाने पर पहाड़ी की खुदाई किए जाने की शिकायत पुणे मनपा से की थी। इसके बाद भवन निर्माण विभाग के अभियंताओं ने मौके का निरीक्षण किया।
निरीक्षण में मेसर्स हिलएज रियल्टी एंड डेवलपर्स एलएलपी की जमीन पर जेसीबी और पोकलेन मशीनों से खुदाई किए जाने की जानकारी सामने आई। परिसर में लोहे की चादरों से घेराबंदी भी की गई थी। शिकायत के अनुसार, संबंधित जमीन बीडीपी और हिलटॉप-हिलस्लोप आरक्षित क्षेत्र में आती है। ऐसे में बिना आवश्यक अनुमति खुदाई किए जाने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
मनपा के भवन निर्माण विभाग ने जमीन मालिक को 1 नवंबर को नोटिस जारी किया। हालांकि, यह नोटिस आधिकारिक लेटरहेड के बजाय साधारण कागज पर दिया गया है। उस पर मनपा की आधिकारिक मुहर और जावक क्रमांक भी दर्ज नहीं है।
इसी वजह से नोटिस की आधिकारिकता और उसकी प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि आरक्षित पहाड़ी क्षेत्र में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर खुदाई होने के बावजूद प्रशासन की कार्रवाई नोटिस तक ही क्यों सीमित है।
पुणे मनपा के शहर अभियंता अनिरुद्ध पावसकर ने बताया कि सुतारदरा में मेसर्स हिलएज रियल्टी एंड डेवलपर्स एलएलपी की जमीन पर बीडीपी क्षेत्र में बिना अनुमति खुदाई का मामला सामने आया है। निरीक्षण के दौरान भारी मशीनों से खुदाई और लोहे की चादरों से घेराबंदी किए जाने की जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि मनपा ने संबंधित काम रुकवा दिया है।
पुणे शहर के पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण और खुदाई को लेकर पहले भी नागरिकों की ओर से चिंता जताई जाती रही है। सुतारदरा का मामला सामने आने के बाद आरक्षित जमीन की सुरक्षा और मनपा की निगरानी व्यवस्था पर फिर सवाल उठे हैं।
अब देखना होगा कि प्रशासन केवल काम रुकवाने तक सीमित रहता है या खुदाई की अनुमति, जमीन के आरक्षण और नियमों के उल्लंघन की विस्तृत जांच कर आगे की कार्रवाई भी करता है।