

सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को गैंग में जोड़ने का आरोप।
शहजाद भट्टी और लॉरेंस बिश्नोई का रिक्रूटमेंट पैटर्न समान बताया गया।
गरीब और कमजोर युवाओं को पैसों का लालच देकर अपराध में धकेलने का दावा।
Shehzad Bhatti Lawrence Bishnoi Mumbai: सोशल मीडिया आज जहां मनोरंजन और संवाद का बड़ा माध्यम बन गया है, वहीं आपराधिक नेटवर्क इसका इस्तेमाल युवाओं को अपने जाल में फंसाने के लिए भी कर रहे हैं। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से कथित संबंध रखने वाले शहजाद भट्टी और गुजरात की साबरमती जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क पर भी युवाओं को ऑनलाइन माध्यम से जोड़ने के आरोप लगते रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों के नेटवर्क में युवाओं को प्रभावित करने और उन्हें आपराधिक गतिविधियों की ओर धकेलने का तरीका काफी हद तक मिलता-जुलता है।
रिपोर्टों के अनुसार, शहजाद भट्टी ने पारंपरिक अंडरवर्ल्ड गतिविधियों से अलग सोशल मीडिया पर भी अपनी पहचान बनाई है। उसके सोशल मीडिया अकाउंट पर करीब 2.5 लाख फॉलोअर्स होने का दावा किया जाता है।
रील्स और अन्य हल्के-फुल्के कंटेंट के जरिए बड़ी संख्या में लोग उससे जुड़ते हैं। हालांकि, इस ऑनलाइन लोकप्रियता के पीछे सक्रिय आपराधिक नेटवर्क होने के आरोप भी सामने आए हैं।
लॉरेंस बिश्नोई के गैंग पर भी सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को अपने नेटवर्क से जोड़ने के आरोप हैं। पिछले कुछ वर्षों में इस गैंग का नाम फिल्मी हस्तियों के घरों और वाहनों पर गोलीबारी जैसी घटनाओं में सामने आया है।
महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री की हत्या के मामले में भी बिश्नोई गैंग का नाम चर्चा में रहा है। इन घटनाओं ने गैंग के नेटवर्क और उसकी गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ाई है।
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ऐसे आपराधिक नेटवर्क खासतौर पर गरीब और निम्न-मध्यमवर्गीय परिवारों के युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। नशे की लत से जूझ रहे और हथियारों या गैंगस्टर संस्कृति से आकर्षित युवाओं के भी इनके निशाने पर होने की बात कही गई है।
शुरुआत में ऑनलाइन पहचान, संपर्क और आर्थिक मदद जैसे प्रलोभनों के जरिए युवाओं को प्रभावित किए जाने का आरोप है। धीरे-धीरे वे गंभीर आपराधिक गतिविधियों में उलझ सकते हैं। कई मामलों में इसका असर न केवल युवाओं के भविष्य पर पड़ता है, बल्कि उनके परिवार भी इसकी कीमत चुकाते हैं।
सोशल मीडिया पर सक्रिय आपराधिक नेटवर्क की पहचान करना और युवाओं को उनके प्रभाव से बचाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऑनलाइन लोकप्रियता और वास्तविक आपराधिक गतिविधियों के बीच अंतर समझना जरूरी है। ऐसे में युवाओं और उनके परिवारों को संदिग्ध ऑनलाइन संपर्कों, पैसों के लालच और अपराध को महिमामंडित करने वाले कंटेंट के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है।