आरोपी की फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
पुणे

पानी की पाइपलाइन के ठेके पास करने के लिए ₹19,000 की रिश्वत मांग, ACB के जाल में फंसे PCMC के मुख्य अभियंता

PCMC Water Pipeline Bribery Case: पिंपरी-चिंचवड मनपा के जल आपूर्ति विभाग के मुख्य अभियंता प्रमोद ओम्भासे को पाइपलाइन के ठेके पास करने के एवज में ₹19,000 की रिश्वत मांगते हुए ACB ने गिरफ्तार किया है।

गोरक्ष पोफली

Highlights

  • PCMC के जल आपूर्ति विभाग के मुख्य अभियंता प्रमोद ओम्भासे गिरफ्तार हुए हैं।

  • पाइपलाइन के ठेके पास करने के एवज में ₹19,000 की रिश्वत मांगी गई थी।

  • ACB की पुणे इकाई ने आरोपी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की।

PCMC Chief Engineer Arrested In Bribery Case: पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका के जल आपूर्ति विभाग में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। ACB की पुणे इकाई ने कार्रवाई करते हुए जल आपूर्ति विभाग के मुख्य अभियंता प्रमोद सुधाकर ओम्भासे को गिरफ्तार कर लिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने लगभग ₹38 लाख मूल्य के नागरिक कार्यों और जल आपूर्ति पाइपलाइन एग्रीमेंट को हरी झंडी देने के बदले ₹19,000 की रिश्वत की मांग की थी।

ACB ने ओम्भासे को गुरुवार दोपहर करीब 3 बजे हिरासत में लिया। उनके खिलाफ पिंपरी-चिंचवड स्थित संत तुकाराम नगर पुलिस स्टेशन में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पूरा मामला और टेंडर का गणित

ACB द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद एक ठेकेदार को दिए गए पांच टेंडरों से जुड़ा हुआ है, जिनकी कुल लागत ₹91.57 लाख थी। ये टेंडर शहर में पानी की पाइपलाइन के रखरखाव, मरम्मत और नई पाइपलाइन बिछाने से संबंधित थे। ठेकेदार को काम शुरू करने का वर्क ऑर्डर प्राप्त करने के लिए एग्रीमेंट दस्तावेजों पर वरिष्ठ अधिकारियों के हस्ताक्षरों की आवश्यकता थी।

ठेकेदार की कंपनियों द्वारा हस्ताक्षरित ये फाइलें पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका के अधीक्षक अभियंता अजय सूर्यवंशी और मुख्य अभियंता प्रमोद ओम्भासे के पास मंजूरी के लिए भेजी गई थीं।

अभियंता ने मांगी 0.5% रिश्वत की मांग

शिकायत के मुताबिक, अधीक्षक अभियंता अजय सूर्यवंशी ने अनुबंधों पर दस्तखत करने के लिए कुल टेंडर मूल्य का 0.5% यानी ₹45,785 बतौर रिश्वत मांगे थे। जब शिकायतकर्ता ने कहा कि वह काम पूरा होने के बाद इस पर विचार करेगा, तो सूर्यवंशी ने पांच में से तीन टेंडर फाइलों पर हस्ताक्षर किए और उन्हें मुख्य अभियंता ओम्भासे की टेबल पर आगे बढ़ा दिया।

फाइलें काफी समय तक लंबित रहने के बाद, शिकायतकर्ता 29 मई 2026 को मुख्य अभियंता प्रमोद ओम्भासे से मिलने पहुंचे। आरोप है कि ओम्भासे ने सभी पांचों टेंडरों के समझौतों पर हस्ताक्षर करने के लिए ₹45,785 की रिश्वत की मांग की। इससे परेशान होकर शिकायतकर्ता ने 11 जून को ACB का दरवाजा खटखटाया।

ACB की जांच और ट्रैप

11 जून को ACB द्वारा की गई प्राथमिक जांच और सत्यापन में यह पुष्टि हुई कि ओम्भासे ने उनकी टेबल पर रखी तीन फाइलों के तहत आने वाले लगभग ₹38 लाख के कार्यों पर 0.5% के हिसाब से ₹19,000 की रिश्वत मांगी थी। जांच के दौरान ACB ने यह भी बताया कि ओम्भासे ने शिकायतकर्ता से पहले भी रिश्वत स्वीकार करने की बात कबूल की थी।

जांच पूरी होने के बाद 29 अक्टूबर को ओम्भासे के खिलाफ औपचारिक मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। ACB की पुणे इकाई ने इस कार्रवाई को अपने वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में अंजाम दिया। इस विशेष ट्रैप टीम का नेतृत्व DSP नीता मिसाल ने किया, जिसमें पुलिस हेड कांस्टेबल चंद्रकांत जाधव, पुलिस कांस्टेबल कैलास महामुलकर और पुलिस कांस्टेबल चंद्रकांत कदम शामिल थे।

ACB की नागरिकों से अपील

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने आम जनता और ठेकेदारों से अपील की है कि यदि कोई भी सरकारी अधिकारी या लोक सेवक किसी भी काम को पूरा करने के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो वे बिना किसी डर के ACB के आधिकारिक शिकायत चैनलों के माध्यम से इसकी रिपोर्ट दर्ज कराएं।

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