विधान परिषद चुनाव में केवल एक सीट पर कांग्रेस की विजय, जानें भाजपा के गढ़ में अभिजीत की जीत के 10 बड़े कारण

Nagpur MLC Election Congress Victory: विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने भाजपा के गढ़ नागपुर में शानदार जीत दर्ज की है। जानिए भाजपा की इस करारी हार और अभिजीत की जीत के 10 बड़े कारण।
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नरेंद्र माेदी, देवेंद्र फडणवीस और अभिजीत वंजारी(सोर्स: डिजाइन फोटो)
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Highlights

  • नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने शानदार जीत दर्ज की है।

  • BJP और RSS के इस अभेद्य गढ़ में कांग्रेस की सफलता बेहद हैरान करने वाली है।

  • सीएम और नितिन गडकरी के गृह क्षेत्र में भाजपा की हार के 10 बड़ कारण जानें।

Maharashtra MLC Election 2026: नागपुर स्नातक सीट जीतकर कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने भाजपा के उस 'कलंक' को धो दिया है जिसका कल तक वे मजाक उड़ाते थे। भाजपा और आरएसएस के इस अभेद्य गढ़ में कांग्रेस की जीत बेहद हैरान करने वाली है, खासकर तब जब नागपुर मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री और नितिन गडकरी जैसे दिग्गजों का गृह क्षेत्र है।

विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक सीटों के चुनाव नतीजों पर सबकी नजरें थीं, क्योंकि इनसे महाराष्ट्र और देश की राजनीति में भाजपा विरोधी लहर का असर स्पष्ट होना था।

भाजपा परिणाम से उत्साहित थी कि कांग्रेस का खाता नहीं खुला और पीएम मोदी व सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया पर तंज भी कसे। लेकिन अभिजीत वंजारी ने कांग्रेस की लगातार हार के सिलसिले को तोड़ते हुए जीत हासिल की, जिससे भाजपा खेमे में सन्नाटा पसर गया।

भाजपा के किले में सेंध लगने के 10 कारण

1. कम प्रभावी उम्मीदवार का चयन

भाजपा प्रत्याशी सुधाकर कोहले नागपुर की सक्रिय राजनीति से लगभग बाहर माने जा रहे थे। विधानसभा चुनाव हारने के बाद से वे संगठनात्मक रूप से अधिक सक्रिय नहीं थे, जिससे मतदाता उनसे दूरी महसूस कर रहे थे।

2. उम्मीदवार की घोषणा से आंतरिक कलह

सुधाकर कोहले के नाम की घोषणा होते ही पार्टी के वरिष्ठ और कर्मठ नेता अनिल सोले नाराज हो गए। इससे चुनाव की शुरुआत में ही भाजपा दो गुटों में बंट गई।

3. वरिष्ठ नेताओं का असंतुष्ट गुट को समर्थन

वरिष्ठ नेता गिरीश व्यास द्वारा अनिल सोले को समर्थन देने से असंतुष्ट खेमा और मजबूत हो गया। हालांकि बाद में भाजपा नेतृत्व ने समझौता कराने का प्रयास किया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।

4. पार्टी के कैडर वोटरों का निष्क्रिय होना

भाजपा के समर्पित मतदाताओं ने उत्साहपूर्वक मतदान नहीं किया, साथ ही कई मत अवैध भी पाए गए।

5. सेकंड प्रेफरेंस मतों की अनदेखी

प्रथम वरीयता की गिनती में सुधाकर कोहले करीब 4,000 से अधिक वोटों से आगे चल रहे थे। हालांकि, पार्टी ने द्वितीय वरीयता वाले वोटों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया, जो एक बड़ी रणनीतिक चूक साबित हुई।

6. निर्दलीय उम्मीदवार नितेश कराले का प्रभाव

निर्दलीय प्रत्याशी नितेश कराले ने मजबूती से चुनाव लड़ा। उनके अधिकांश सेकंड प्रेफरेंस वोट अभिजीत वंजारी के पक्ष में गए, जो चुनाव का गेमचेंजर साबित हुआ।

7. छोटे दलों की उपेक्षा

भाजपा ने छोटे राजनीतिक दलों को साथ साधने पर ध्यान नहीं दिया। इसके परिणामस्वरूप उनके सेकंड और थर्ड प्रेफरेंस वोट अभिजीत वंजारी को मिल गए।

8. कांग्रेस की सुनियोजित रणनीति

चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने अन्य प्रत्याशियों के समर्थकों से द्वितीय वरीयता वोट मांगने की योजनाबद्ध रणनीति अपनाई।

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9. पारंपरिक वोट बैंक में नाराजगी

ब्राह्मण उम्मीदवार को मैदान में न उतारने के कारण RSS और भाजपा के कई पारंपरिक वोटरों के बीच नाराजगी को भी हार का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।

10. अवैध मतों का नुकसान

प्रत्याशी सुधाकर कोहले के अनुसार, करीब 9,000 मतदाताओं ने मतपत्र पर गलत तरीके से अंक 2 लिखा, जिसके कारण उनके वोट खारिज हो गए और वे पिछड़ गए।

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दिग्गज नेताओं के गृह नगर में हार है चेतावनी

नागपुर जैसे मजबूत गढ़ में हार होना भाजपा के लिए एक गंभीर चेतावनी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और चंद्रशेखर बावनकुले जैसे कद्दावर नेताओं के प्रत्यक्ष चुनाव प्रचार के बावजूद यह पराजय पार्टी के लिए चिंताजनक स्थिति पैदा करती है। यदि समय रहते इस पर सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो राज्य की राजनीति में बड़े उलटफेर देखने को मिल सकते हैं।

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