प्रदर्शन से अर्थव्यवस्था को कितना होता है नुकसान ? कारोबार,रोजगार और जनता की जेब पर पड़ने वाले प्रभाव को समझे

INDIA Bloc Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और SIR बंद करने को लेकर विपक्ष 1 नवंबर को रामलीला मैदान में महारैली करने जा रहा है। इसको लेकर व्यापार को बड़ा घाटा होगा।
delhi protest
दिल्ली प्रदर्शनसोर्स-सोशल मीडिया
Published on: 
Updated on: 

Highlights:

  • प्रदर्शन से व्यापार होता प्रभावित

  • आम जनता की जेब होती है ढीली

  • मौजूदा विरोध प्रदर्शन से 3 हजार करोड़ से ज्यादा का हो चुका है व्यापार घाटा

How Much Economic Loss Do Protests Cause?: INDIA ब्लॉक और सीजेपी के द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर करीब 27 दिनों से हो रहे विरोध प्रदर्शन का असर व्यापार पर पड़ा है। व्यापारियों के द्वारा अनुमानित घाटा 3 हजार करोड़ से अधिक का बताया जा रहा है। इसी बीच आगामी 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA ब्लॉक की महारैली होनी है। इस रैली को लेकर व्यापारियों का कहना है कि रैली होने से व्यापारिक घाटा 10 हजार करोड़ तक पहुंच जाएगा।

व्यापारियों ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर इस रैली की तारिख आगे बढ़ाने की अपील की थी लेकिन बात नहीं बन पाई। ऐसे में त्योहारों का सीजन और दिल्ली में प्रदर्शन से व्यापारियों की आर्थिक स्थिति बहुत सोचनीय होते जा रही है। इस प्रदर्शन का प्रभाव आम जनता को भी झेलना पड़ेगा।

ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर विरोध प्रदर्शनों से अर्थव्यवस्था को कितना नुकसान होता है और इसकी कीमत किसे चुकानी पड़ती है?

कारोबार पर कैसे पड़ता है असर?

जब किसी शहर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन होते हैं और सड़कें बंद हो जाती हैं, तो दुकानों, बाजारों, मॉल और छोटे कारोबारियों का काम प्रभावित हो सकता है। ग्राहक बाजार तक नहीं पहुंच पाते और कई दुकानदारों को समय से पहले दुकानें बंद करनी पड़ती हैं। इससे बिक्री में गिरावट आती है।

छोटे कारोबारियों पर इसका असर अधिक पड़ सकता है, क्योंकि उनकी रोजाना की कमाई पर ही दुकान का किराया, कर्मचारियों की तनख्वाह और अन्य खर्च निर्भर करते हैं। हालांकि, नुकसान की वास्तविक मात्रा प्रदर्शन की अवधि, स्थान और प्रभावित कारोबार पर निर्भर करती है।

परिवहन और सप्लाई चेन पर असर

प्रदर्शन के दौरान सड़कें जाम होने, रेल सेवाएं बाधित होने या वाहनों की आवाजाही रुकने से माल की ढुलाई प्रभावित हो सकती है। इससे कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार उत्पादों की डिलीवरी में देरी होती है।

ट्रांसपोर्ट कंपनियों को ईधन और समय का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है। वहीं, जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित होने पर कारोबारियों और उपभोक्ताओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

रोजगार और मजदूरों की कमाई पर असर

दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा चालकों, डिलीवरी कर्मचारियों और छोटे दुकानदारों की आय रोजाना के काम पर निर्भर करती है। यदि प्रदर्शन के कारण काम बंद रहता है, तो उनकी एक दिन की कमाई भी प्रभावित हो सकती है।

इसके अलावा, लंबे समय तक अशांति रहने से कंपनियां निवेश और विस्तार के फैसले टाल सकती हैं। हालांकि, रोजगार पर इसका असर हर प्रदर्शन में समान नहीं होता।

delhi protest
Firecracker Ban: पटाखों पर बैन के पक्ष में नहीं SC, विराट कोहली का जिक्र कर क्या कहा?

आम जनता की जेब पर क्या पड़ता है असर?

प्रदर्शन के कारण ट्रैफिक जाम में फंसने से लोगों का ईंधन और समय खर्च होता है। सार्वजनिक परिवहन बाधित होने पर वैकल्पिक साधनों पर अधिक पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। जरूरी सेवाओं और सामान की आपूर्ति प्रभावित होने पर भी लोगों को परेशानी हो सकती है।

delhi protest
40 साल की दोस्ती और हर बड़े काम में अहम भूमिका, कौन हैं मुकेश अंबानी के खास दोस्त MM?

कितना होता है आर्थिक नुकसान?

विरोध प्रदर्शनों से होने वाले नुकसान का कोई एक तय आंकड़ा नहीं है। इसका आकलन करने के लिए प्रभावित कारोबार, कामकाज बंद रहने की अवधि, परिवहन में देरी और उत्पादन में आई गिरावट जैसे पहलुओं को देखना पड़ता है।

1 नवंबर की महारैली का क्या होगा असर?

विपक्ष के द्वारा 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और SIR प्रक्रिया को बंद करने को लेकर विरोध प्रदर्शन होने जा रहा है। व्यापारी इस प्रदर्शन की तारिख को आगे बढ़ाने की अपील राहुल गांधी से कर चुके हैं। व्यापारियों का कहना है कि अगर ये प्रदर्शन होता है तो त्योहारों के कारण आम जनता के साथ-साथ व्यापारियों को समस्या होगी। व्यापारियों का कहना है कि इस प्रदर्शन से जो व्यापार घाटा अभी 3 हजार करोड़ का है वो 10 हजार करोड़ का हो जाएगा।