पुणे में प्रोटेस्ट (सोर्स: सोशल मीडिया)
पुणे

पुणे की सड़कों पर MPSC छात्रों का सैलाब! पेपर लीक, भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन और चेयरमैन के इस्तीफे की मांग

MPSC Protest Pune: पुणे में MPSC उम्मीदवारों का भ्रष्टाचार और ड्रग इंस्पेक्टर पेपर लीक के खिलाफ विशाल प्रदर्शन। जानें छात्रों की प्रमुख मांगें और आंदोलन से जुड़ी पूरी खबर।

गोरक्ष पोफली

MPSC Students Protest Pune: महाराष्ट्र के पुणे शहर की सड़कों पर इन दिनों युवाओं का एक सैलाब उमड़ पड़ा है। दिल्ली, रांची और पटना में छात्रों के हालिया आंदोलनों की गूंज अब महाराष्ट्र के शिक्षा केंद्र पुणे में भी साफ सुनाई दे रही है। MPSC के हजारों उम्मीदवारों ने परीक्षा प्रणाली में धांधली, अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सड़कों पर उतरने का फैसला किया है। आंदोलनकारी छात्रों ने ओमकारेश्वर मंदिर चौक से पुणे जिला कलेक्टरेट तक एक विशाल मार्च निकाला, जहां उन्होंने अपनी मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की।

छात्रों की सबसे प्रमुख मांगों में परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता लाना और MPSC के चेयरमैन विवेक भिमनवार तथा सचिव का तत्काल इस्तीफा शामिल है, ताकि आयोग में साफ-छवि वाले अधिकारियों की नियुक्ति की जा सके।

ड्रग इंस्पेक्टर पेपर लीक और गिरफ्तारियों का सच

यह आक्रोश अचानक नहीं भड़का है, बल्कि इसके पीछे हाल ही में सामने आई अनियमितताएं हैं। मुख्य विवाद ड्रग इंस्पेक्टर (Group-B) स्क्रीनिंग परीक्षा के पेपर लीक से जुड़ा है, जो मार्च में आयोजित की गई थी। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच इस मामले की जांच कर रही है। इस परीक्षा को रद्द कर दिया गया है और अब दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी। पुलिस जांच में अब तक कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार लोगों में तीन MPSC के अपने अधिकारी शामिल हैं जिनमें अंडर-सेक्रेटरी अभिजीत लेंधवे, और सहायक अनुभाग अधिकारी विश्वेश्वर दत्तात्रय नकाते व गोपाल भट्टू मराठे शामिल हैं। इसके अलावा सातवीं रैंक हासिल करने वाली एक महिला उम्मीदवार को भी गिरफ्तार किया गया है।

जांचकर्ताओं का आरोप है कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र उम्मीदवारों तक पहुंच गया था। जांच के दौरान एक आरोपी अधिकारी का लैपटॉप भी जब्त किया गया है और पुलिस कोचिंग संस्थानों व बिचौलियों के कनेक्शन की बारीकी से जांच कर रही है।

छात्रों की प्रमुख मांगें और आक्रोश

पुणे के इस आंदोलन में छात्रों ने सरकार और आयोग के सामने अपनी मांगों की एक लंबी सूची रखी है।

  • क्राइम ब्रांच की रिपोर्ट सार्वजनिक हो: ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा लीक मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच द्वारा MPSC को सौंपी गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को तुरंत सार्वजनिक किया जाए।

  • फोरेंसिक ऑडिट की मांग: गिरफ्तार अंडर-सेक्रेटरी अभिजीत लेंधवे के कार्यकाल में आयोजित सभी परीक्षाओं का एक विस्तृत फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए।

  • सेवा रिकॉर्ड की जांच: आरोपी अधिकारियों लेंधवे, नकाते और मराठे के सेवा रिकॉर्ड और उनके प्रमोशन के मानदंडों की कड़ी जांच हो।

  • कॉल डिटेल्स की जांच: संदिग्ध रूप से चुने गए उम्मीदवारों और उनके संपर्कों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाले जाएं ताकि बिचौलियों का पर्दाफाश हो सके।

  • मूल्यांकन में गड़बड़ियों की जांच: 2025 राज्य सेवा मुख्य और कृषि सेवा परीक्षाओं के वर्णनात्मक पेपरों के मूल्यांकन में हुई कथित त्रुटियों की जांच की जाए।

  • आठ दिनों की समय-सीमा: ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा से जुड़े ऑब्जेक्शन्स पर आयोग आठ दिनों के भीतर आधिकारिक प्रतिक्रिया दे और जांच शुरू करे।

  • भविष्य की परीक्षाओं में सुरक्षा: आगामी 25 अक्टूबर 2026 को होने वाली Group-C प्रारंभिक परीक्षा में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत सख्त कदम उठाए जाएं।

  • Stenographer पद की बहाली: छात्रों ने इस पद को फिर से बहाल करने की भी मांग की है।

राजनीतिक समर्थन और छात्रों का नेतृत्व

इस आंदोलन की खास बात यह है कि इसे पूरी तरह से छात्रों द्वारा ही संचालित किया जा रहा है। हालांकि, छात्रों की आवाज को बुलंद करने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार और कांग्रेस विधायक विश्वजीत कदम भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए।

रोहित पवार ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल का नहीं बल्कि स्वयं MPSC के उम्मीदवारों का है, और सरकार को इन युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर तुरंत कड़े कदम उठाने चाहिए।

चेयरमैन और सरकार का क्या है रुख?

भारी दबाव के बावजूद MPSC चेयरमैन विवेक भिमनवार ने अपने पद से इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है। उनका तर्क है कि ड्रग इंस्पेक्टर पेपर लीक की घटना उनके कार्यभार संभालने से पहले की है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक आंतरिक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।

दूसरी ओर, महाराष्ट्र सरकार ने भी परीक्षा प्रणाली में सुधार, पारदर्शिता, सुरक्षा और विश्वसनीयता को मजबूत करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई है। यह समिति छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और कोचिंग संस्थानों जैसे सभी हितधारकों के साथ विचार-विमर्श कर नए सुरक्षा उपाय लागू करेगी।

यह आंदोलन अब केवल पुणे तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात की आशंका भी बढ़ रही है कि यह मुंबई और राज्य के अन्य बड़े शहरों में भी फैल सकता है। राज्य के लाखों युवाओं का भविष्य इस बात पर टिका है कि सरकार परीक्षा प्रणाली की शुचिता को बहाल करने के लिए कितनी जल्दी और कितने ठोस कदम उठाती है।

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