आईएमडी पुणे (सौ. सोशल मीडिया ) 
पुणे

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग का स्वदेशी सिस्टम लॉन्च: अब और सटीक होगा मौसम पूर्वानुमान

IMD Pune ने मौसम पूर्वानुमान को और सटीक बनाने के लिए स्वदेशी डिजिटल सरफेस मेटेरोलॉजिकल ऑब्जर्वेशन सिस्टम विकसित किया है, जिससे रियल-टाइम डेटा और आपदाओं की समय पर चेतावनी संभव होगी।

अपूर्वा नायक

IMD Digital Weather System India: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), पुणे ने मौसम पूर्वानुमान की सटीकता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए स्वदेशी 'डिजिटल सरफेस मेटेरोलॉजिकल ऑब्जर्वेशन सिस्टम' विकसित किया है।

यह अत्याधुनिक प्रणाली देशभर में मौसम की निगरानी को आधुनिक बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। इस नई तकनीक का उद्घाटन विश्व मौसम विज्ञान दिवस के अवसर पर किया गया। अधिकारियों के अनुसार, इस सिस्टम को आगामी दो से तीन वर्षों में चरणबद्ध तरीके से देशभर के मौसम केंद्रों पर लागू किया जाएगा।

चरणबद्ध तरीके से देश के सभी मौसम केंद्रों पर किया जाएगा लागू

यह प्रणाली पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित है और इसमें वाई-फाई सक्षम डिजिटल सेंसर का उपयोग किया गया है। ये सेंसर तापमान, आर्द्रता, वायुदाब, हवा की गति और दिशा के साथ-साथ वर्षा जैसे महत्वपूर्ण आंकड़े मापते हैं। इस प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि डेटा रियल-टाइम में जियो-टैग के साथ भेजा जाता है, जिससे मौसम का त्वरित विश्लेषण संभव हो पाता है।

'आत्मनिर्भर भारत' की ओर महत्वपूर्ण कदम, पर्यावरण संरक्षण को भी मिलेगा बढ़ावा

यह सिस्टम पुराने पारे (मरकरी) आधारित उपकरणों का स्थान लेगा, जो न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक थे, बल्कि डेटा की गति और सटीकता में भी सीमित थे। इस डिजिटल तकनीक से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भारत अंतरराष्ट्रीय मानकों के समकक्ष खड़ा होगा।

इस प्रणाली में ऑटोमेटेड क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम शामिल है, जो त्रुटिपूर्ण या असामान्य डेटा को स्वतः पहचानकर फिल्टर कर देता है। इसके अतिरिक्त, रिमोट मॉनिटरिंग और ऑनलाइन डैशबोर्ड की सुविधा से वैज्ञानिक दूर रहकर भी उपकरणों की निगरानी और रखरखाव कर सकेंगे। आईएमडी अधिकारियों के अनुसार, इस सिस्टम से हर मिनट डेटा रिकॉर्ड होगा, जिससे भारी बारिश, तूफान और हीटवेव जैसी आपदाओं की समय रहते सटीक चेतावनी दी जा सकेगी।

यह पहल 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत महत्वपूर्ण है। इससे विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होगी और घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा। यह अंतरराष्ट्रीय समझौतों के अनुरूप पारे के उपयोग को कम करने के भारत के संकल्प को भी पूरा करती है।

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