पुणे में मुला-मुठा नदी बचाने की तैयारी, हाउसिंग सोसायटी के STP पर लगेंगे सेंसर

Pune MNC अब हाउसिंग सोसायटियों के निजी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पर सेंसर लगाने की तैयारी में है। 750 से अधिक प्लांट डिजिटल निगरानी के दायरे में आएंगे, ताकि मुला-मुठा नदी में प्रदूषण रोका जा सके।
Mula Mutha Bhima River Pollution
पुणे मुला नदी प्रदूषण (सौ. सोशल मीडिया )
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Pune PMC STP Sensor Plan: शहर में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए पुणे महानगर पालिका (पीएमसी) ने अब बेहद सख्त रुख अपना लिया है।

निर्माण परियोजनाओं से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए सेंसर अनिवार्य करने के बाद, प्रशासन अब मुला-मुठा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए एक ठोस कदम उठा रहा है।

इसके तहत हाउसिंग सोसायटियों के निजी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) पर सेंसर लगाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है, ताकि नदियों में छोड़े जाने वाले पानी की शुद्धता की डिजिटल निगरानी की जा सके।

गौरतलब है कि महानगरपालिका नदी स्वच्छता के लिए प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये खर्च करती है और शहर के विभिन्न हिस्सों में जल शुद्धिकरण केंद्र संचालित कर रही है। नियमों के अनुसार, बड़ी हाउसिंग सोसायटियों के लिए परिसर में ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाना और उसे सुचारू रूप से चलाना अनिवार्य है, ताकि शोधित जल ही विसर्जित किया जाए।

750 से अधिक निजी प्लांट मनपा की रडार पर

हालांकि, प्रशासन को लगातार ऐसी शिकायते मिल रही थी कि कई सोसायटियों में ये प्लांट केवल दिखावे के लिए लगाए गए है या अक्सर बंद रहते हैं। अब इन निजी प्लांट्स की निगरानी के लिए डिजिटल सिस्टम तैयार किया गया है।

अतिरिक्त आयुक्त पृथ्वीराज बी पी ने बताया कि सेंसर तकनीक के माध्यम से अब एक क्लिक पर यह पता चल सकेगा कि प्लांट चालू है या नहीं और उससे निकलने वाले पानी की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है या नहीं। वर्तमान में पुणे की विभिन्न सोसायटियों में 750 से अधिक निजी एसटीपी प्लांट कार्यरत हैं। नियमों के मुताबिक, 100 से अधिक फ्लैट वाली नई सोसायटियों के लिए इन्हें स्थापित करना अनिवार्य है।

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