Ganeshotsav DJ Sound Rules: पुणे के ऐतिहासिक गणेशोत्सव में इस बार डीजे के कानफोड़ शोर और विशाल साउंड सिस्टम को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। पारंपरिक ढोल-ताशा संस्कृति के बीच तेजी से बढ़ते डीजे और बड़े साउंड सिस्टम के इस्तेमाल को लेकर पुलिस और गणेश मंडलों के बीच खींचतान तेज हो गई है। वहीं, बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों पर तेज आवाज के असर को लेकर आम नागरिक भी विरोध में सामने आ रहे हैं।
बढ़ते जनआक्रोश और ध्वनि प्रदूषण की शिकायतों को देखते हुए पुणे पुलिस ने इस वर्ष गणेशोत्सव के दौरान 'प्रेशर मिड' और 'प्लाज्मा' डीजे सिस्टम के इस्तेमाल पर रोक लगाने का फैसला किया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई केवल डेसिबल मीटर से आवाज मापने तक सीमित नहीं रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले मंडलों के महंगे साउंड उपकरण मौके पर ही जब्त किए जा सकते हैं।
पुलिस प्रशासन के अनुसार, ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने वालों पर पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत कार्रवाई की जाएगी। दी गई जानकारी के मुताबिक, अधिनियम की धारा 15 के तहत दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की कैद और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
आवासीय क्षेत्रों में दिन के समय 55 डेसिबल और रात में 45 डेसिबल की सीमा निर्धारित है। वहीं, साइलेंस जोन में दिन में 50 और रात में 40 डेसिबल की सीमा लागू होती है। प्रशासन इन नियमों का कड़ाई से पालन कराने की तैयारी में है।
तुलसीबाग गणपति मंडल के प्रतिनिधि नितिन पंडित ने कहा कि सभी गणेश मंडलों को सरकारी नियमों का सम्मान करते हुए सामाजिक सौहार्द और पारंपरिक उत्साह के बीच संतुलन कायम करना चाहिए।
हालांकि, डीजे कारोबार से जुड़े लोगों ने पूर्ण प्रतिबंध का विरोध किया है। डीजे संचालक प्रशांत काबले का कहना है कि सरसकट प्रतिबंध से साउंड, लाइटिंग, तकनीकी सेवाओं और मंडप से जुड़े हजारों छोटे कामगारों की रोजी-रोटी प्रभावित हो सकती है। उनका सुझाव है कि पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के बजाय समय और डेसिबल स्तर के आधार पर नियंत्रण किया जाना चाहिए।
राज्यसभा सांसद प्रो. मेधा कुलकर्णी ने इससे भी आगे बढ़कर कहा है कि डीजे पर रोक सिर्फ गणेशोत्सव तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उनका कहना है कि किसी भी धर्म के त्योहार या जयंती पर तेज आवाज वाले डीजे का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों का हवाला देते हुए उन्होंने गणेश मंडलों से अपील की कि कानफोड़ शोर के बजाय लोकमान्य तिलक के गणेशोत्सव के मूल उद्देश्य 'समाज प्रबोधन' पर ध्यान दिया जाए।
गणेशोत्सव में डीजे और साउंड सिस्टम अब केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये के कारोबार का हिस्सा बन चुका है। बड़े गणेश मंडलों में एक दिन के साउंड सिस्टम का खर्च करीब 1 से 1.5 लाख रुपये तक बताया जाता है। जुलूस, लाइटिंग, ट्रांसपोर्ट और विशेष पैकेज के साथ यह खर्च 3 से 5 लाख रुपये तक पहुंच सकता है।
वहीं, प्रीमियम और अति-भव्य सेटअप के लिए डीजे संचालक 10 से 12 लाख रुपये तक चार्ज करते हैं।
अब देखना यह होगा कि पुणे में इस बार परंपरा बनाम तेज आवाज और कारोबार की इस बहस के बीच प्रशासन अपने सख्त नियमों को जमीन पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू कर पाता है।