CJI सूर्यकांत के विरोध के बीच NLSIU ने 34वां दीक्षांत समारोह किया कैंसिल, 12 सितंबर को होना था आयोजन

NLSIU Bengaluru Cancels Convocation: CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने के विरोध के बीच बेंगलुरु NLSIU ने 12 सितंबर को होने वाला 34वां दीक्षांत समारोह रद्द कर दिया। जानिए क्या है पूरा विवाद।
NLSIU Bengaluru Cancels Convocation
सीजेआई सूर्यकांत (सौ. डिजाइन फोटो)
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CJI Suryakant Protest: बेंगलुरु के नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी ने 12 सितंबर को होने वाले अपने 34वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को अचानक रद्द कर दिया है। विश्वविद्यालय ने 27 अगस्त को जारी अपने आधिकारिक नोटिस में इस बड़े फैसले के पीछे 'अपरिहार्य परिस्थितियों' को वजह बताया है।

हालांकि, यह फैसला ऐसे समय में आया है जब संस्थान के मौजूदा और पूर्व छात्रों का एक बहुत बड़ा समूह इस समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा की मौजूदगी का पुरजोर विरोध कर रहा था।

700 से ज्यादा छात्रों और अलुमनी ने दर्ज कराई थी आपत्ति

दीक्षांत समारोह को लेकर विवाद तब गहराया जब NLSIU के 700 से अधिक छात्रों और पूर्व छात्रों ने BCI चेयरमैन और CJI की प्रस्तावित मौजूदगी पर कड़ी आपत्ति जताई। विरोध दर्ज कराने वाले इस पत्र पर 165 ग्रेजुएटिंग छात्रों, 409 मौजूदा छात्रों और 128 पूर्व छात्रों ने हस्ताक्षर किए थे। विरोध करने वाले छात्रों ने इसके साथ ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया से NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के छात्रों और फैकल्टी समुदाय से बिना शर्त माफी मांगने की मांग भी रखी थी।

कूरियर से भेजी जाएंगी डिग्रियां

यूनिवर्सिटी प्रशासन के मुताबिक 34वां दीक्षांत समारोह 12 सितंबर को प्रस्तावित था, जिसकी जानकारी अकादमिक प्रशासन ने 3 अगस्त को छात्रों को दी थी। 27 अगस्त के नोटिस में रजिस्ट्रार ने स्पष्ट किया कि तमाम कोशिशों के बावजूद ऐसी परिस्थितियां बन गई हैं कि विश्वविद्यालय समारोह का आयोजन करने में सक्षम नहीं है।

यूनिवर्सिटी ने यह भी जानकारी दी है कि सभी पास आउट हो रहे छात्रों को जरूरी प्रशासनिक मंजूरियां मिलने के बाद बिना किसी औपचारिक समारोह के ही डिग्रियां प्रदान कर दी जाएंगी। छात्रों को उनकी डिग्री और प्रमाणपत्र कूरियर से भेजने या खुद कैंपस आकर लेने का विकल्प दिया जाएगा। इसके लिए विश्वविद्यालय जल्द ही एक नया फॉर्म और पूरी प्रक्रिया साझा करेगा।

इसी बीच, सौरव दास ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि उन्हें उम्मीद है कि NLSIU का ग्रेजुएटिंग बैच अपना खुद का दीक्षांत समारोह आयोजित करेगा और छात्रों को सम्मानित करने के लिए अपने पसंदीदा सम्मानित अतिथि को बुलाएगा।

पिछले एक महीने में 4 संस्थानों में देखने को मिला ऐसा विरोध

देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में CJI सूर्यकांत की मौजूदगी का विरोध होने का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले एक महीने के भीतर यह चौथा ऐसा संस्थान है, जहां CJI के विरोध के बाद दीक्षांत समारोह को या तो कैंसिल करना पड़ा या मुख्य अतिथि को बदलना पड़ा। आइए डालते हैं एक नजर....

1. NALSAR, हैदराबाद: सबसे पहले कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बाद लॉ यूनिवर्सिटीज में CJI का विरोध शुरू हुआ था। NALSAR हैदराबाद के लगभग 450 छात्रों ने पत्र लिखकर CJI को चीफ गेस्ट बनाने का न्योता वापस लेने की मांग की थी। विवाद इतना बढ़ा कि BCI ने कुछ समय के लिए छात्रों के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगा दी थी, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। CJI ने बाद में कहा कि उन्होंने निमंत्रण स्वीकार ही नहीं किया था।

2. TISS, मुंबई: टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज ने 2 अगस्त को होने वाला अपना 86वां दीक्षांत समारोह स्थगित कर दिया था। उस वक्त संस्थान ने अप्रत्याशित परिस्थितियों का हवाला दिया था, लेकिन रिपोर्टों में CJI सूर्यकांत की मौजूदगी पर संभावित विरोध को वजह बताया गया। बाद में 22 अगस्त को डॉ. सीएस प्रमेश की मुख्य अतिथ्य में यह समारोह पूरा हुआ।

3. ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी, सोनीपत: 25 जुलाई को यूनिवर्सिटी के 15वें दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित थे, लेकिन वे इसमें शामिल नहीं हुए। उनकी जगह सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की थी।

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CJI के किस बयान से शुरू हुआ था 'कॉकरोच जनता पार्टी' विवाद?

इस पूरे विवाद की जड़ें मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट की एक सुनवाई से जुड़ी हैं। 15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट की बेंच में एक याचिका पर सुनवाई के दौरान, जब सीनियर एडवोकेट के दर्जे पर चर्चा हो रही थी, तब CJI सूर्यकांत ने एक विवादित टिप्पणी की थी।

CJI ने कहा था कि 'कॉकरोच की तरह बहुत से युवा ऐसे हैं, जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। वे सोशल मीडिया और RTI एक्टिविस्ट बन रहे हैं। हजारों ऐसे हैं जो काले चोगे पहनकर घूम रहे हैं, लेकिन उनकी डिग्रियों पर संदेह है।'

इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम से एक अभियान शुरू हुआ। 20 जून से 25 जुलाई तक जंतर-मंतर पर भारी प्रदर्शन भी देखने को मिला, जो आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद समाप्त हुआ था। उसी बयान का असर अब देश के बड़े लॉ कॉलेजों में देखने को मिल रहा है।

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