खड़कवासला बांध में गाद जमा होने से आधा हुआ पानी, बीजेपी सांसद मेधा कुलकर्णी ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा

Pune Khadakwasla Dam Silt Issue: पुणे के खड़कवासला बांध में गाद जमने से उसकी संग्रहण क्षमता घटकर आधी से कम रह गई है। राज्यसभा में सांसद मेधा कुलकर्णी ने शहर के गहराते जल संकट पर चिंता जताई।
Water levels in Khadakwasla Dam halved due to silt accumulation; Medha Kulkarni raises the issue in Rajya Sabha
मेधा कुलकर्णीसोर्स- सोशल मीडिया
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Medha Kulkarni Raises Khadakwasla Dam Issue In Rajya Sabha : महाराष्ट्र से भाजपा सांसद डॉ. मेधा कुलकर्णी ने पुणे शहर और आसपास के क्षेत्रों की दीर्घकालिक जल सुरक्षा को लेकर संसद में गंभीर चिंता जताई है। राज्यसभा में विशेष उल्लेख के दौरान उन्होंने कहा कि पुणे की जल आपूर्ति की प्रमुख आधारशिला माने जाने वाले खड़कवासला बांध की जल संग्रहण क्षमता लगातार घट रही है। ऐसे में भविष्य में पुणे को बड़े जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।

गाद जमा होने से घट रही बांध की क्षमता

मेधा कुलकर्णी ने कहा कि पिछले कई दशकों से खड़कवासला बांध में लगातार गाद जमा होने के कारण इसकी जल संग्रहण क्षमता में भारी कमी आई है। उनके अनुसार, बांध को मूल रूप से करीब 3.75 टीएमसी पानी के भंडारण के लिए तैयार किया गया था, लेकिन वर्तमान में इसकी क्षमता घटकर लगभग 1.75 टीएमसी रह गई है।

पुणे की बढ़ती आबादी से बढ़ी पानी की जरूरत

सांसद ने कहा कि पुणे देश के तेजी से विकसित हो रहे महानगरीय क्षेत्रों में शामिल है। शहर और आसपास के इलाकों में आबादी बढ़ने के साथ पीने के पानी, उद्योग, सार्वजनिक सेवाओं और अन्य जरूरतों के लिए पानी की मांग भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में जलाशय की घटती क्षमता भविष्य में बड़ी चुनौती बन सकती है।

मानसून में पानी बचाने की क्षमता प्रभावित

बांध की भंडारण क्षमता कम होने से मानसून के दौरान पर्याप्त पानी संरक्षित करने और गर्मी या सूखे के समय बढ़ती शहरी मांग को पूरा करने की क्षमता प्रभावित हो रही है। इससे पुणे की मौजूदा जल वितरण व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है।

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दीर्घकालिक जल सुरक्षा पर उठे सवाल

मेधा कुलकर्णी ने कहा कि खड़कवासला बांध की घटती क्षमता केवल मौजूदा जल प्रबंधन की समस्या नहीं है, बल्कि यह पुणे की दीर्घकालिक जल सुरक्षा से भी जुड़ा गंभीर मुद्दा है। उन्होंने जलाशय की क्षमता, जल भंडारण और वितरण प्रणाली को लेकर प्रभावी दीर्घकालिक योजना की जरूरत पर जोर दिया।

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