पुणे पुलिस दल (सोर्स: सोशल मीडिया)
पुणे

भारती विद्यापीठ पुलिस स्टेशन मामला: MSHRC के आदेश पर सीनियर PI मानसिंह पाटिल समेत 11 पुलिस अधिकारियों पर केस

Pune Bharati Vidyapeeth Police Station FIR 11 Cops: पुणे में 8 नाबालिगों की कथित अवैध हिरासत और मारपीट के मामले में 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है

वेदांत जोशी

Ambegaon Pathar Police Chowky Minor Assault MSHRC: पुणे के भारती विद्यापीठ पुलिस स्टेशन में 11 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। यह मामला जुलाई में अंबेगांव पाथर पुलिस चौकी में आठ नाबालिगों को कथित तौर पर अवैध रूप से हिरासत में रखने और उनके साथ मारपीट किए जाने के आरोपों से जुड़ा है।

यह FIR 24 सितंबर 2026 को महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग (MSHRC) के निर्देश के बाद दर्ज की गई। आयोग ने कानून के उल्लंघन के आरोपों से जुड़े बच्चों (Children in Conflict with Law - CCLs) के साथ कथित व्यवहार की तथ्य-जांच के बाद कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

FIR Crime No. 0483/2026 के तहत दर्ज की गई है और इसमें 20 और 21 जुलाई को हुई कथित घटनाओं का उल्लेख है।

दो दिनों में 8 नाबालिगों को लाने का आरोप

शिकायत के अनुसार, 20 जुलाई को चार CCLs को अंबेगांव पाथर पुलिस चौकी लाया गया, जबकि अगले दिन चार अन्य नाबालिगों को कथित तौर पर हिरासत में लिया गया। इस तरह कुल आठ नाबालिग इस मामले में शामिल बताए गए हैं।

शिकायत में नाबालिगों को कथित तौर पर रोकने और उनके साथ मारपीट करने के आरोप लगाए गए हैं। इनमें बेल्ट से पीटने का आरोप भी शामिल है।

3 नाबालिगों को पुलिस वाहन पर बांधने का आरोप

मामला उस कथित घटना से भी जुड़ा है, जिसमें 17 वर्षीय एक लड़के की कात्रज झील के पास मौत के मामले में हिरासत में लिए गए तीन नाबालिगों को कथित तौर पर पुलिस वाहन के बोनट से बांधकर अंबेगांव पाथर पुलिस चौकी से भारती विद्यापीठ पुलिस स्टेशन की ओर सार्वजनिक रूप से ले जाया गया।

इस कथित घटना का एक वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ था। इसके बाद नाबालिगों के साथ पुलिस के कथित व्यवहार को लेकर सवाल उठे।

मानवाधिकार आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए तथ्य-जांच समिति गठित की थी। आयोग के समक्ष पेश रिपोर्ट के अनुसार, आरोपों में आठ नाबालिगों की कथित अवैध हिरासत, शारीरिक मारपीट और निर्धारित समय के भीतर उन्हें Juvenile Justice Board के समक्ष पेश न करना शामिल था।

11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR

10 सितंबर को जारी अंतरिम आदेश में महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग ने महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (DGP) को तथ्य-जांच रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेजों को FIR के रूप में लेते हुए जांच शुरू करने का निर्देश दिया था।

FIR में जिन 11 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है, उनमें:

  • Mansingh Patil — Senior Police Inspector

  • Ganesh Mohite — Assistant Police Inspector

  • Snehal Thorat — Assistant Police Inspector

  • Nilesh Mokashi — Police Inspector

  • Sunil Hanwate — Police Head Constable

  • Dinesh Tapke — Police Head Constable

  • Mitesh Chormole — Police Constable

  • Sagar Borse — Police Constable

  • Soham Rodekar — Police Constable

  • Mangesh Pawar — Police Constable

  • Swapna Bhise — Woman Police Constable

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अनुसूचित जाति से संबंधित कुछ बच्चों के साथ कथित तौर पर जातिसूचक गालियों का इस्तेमाल किया गया और उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया।

BNS, Juvenile Justice और SC/ST Act के तहत धाराएं

FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इनमें धारा 115(2), 120, 127(2), 127(3), 131, 352, 351(2), 198, 199, 336(2) और 337 शामिल हैं।

इसके अलावा Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 की धारा 74 और 75 तथा Scheduled Castes and Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act, 1989 की संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं।

मानवाधिकार आयोग ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से जुड़े आरोपों को देखते हुए जांच Additional Director General of Police (ADGP) या उससे ऊपर के स्तर के अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया था। शिकायत के विवरण के अनुसार, जांच की जिम्मेदारी Additional Director General of Police Sunil Ramanand को सौंपी गई है।

मामले में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है। FIR दर्ज होना आरोपों की पुष्टि या आरोपियों को दोषी ठहराया जाना नहीं है। मामले में आगे की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

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