Palghar Flood Video Family Trapped On Roof: सोशल मीडिया पर एक दिल दहला देने वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर किसी की भी रूह कांप जाए। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो पालघर जिले के केवले इलाके के देवीपाडा का है। इस वीडियो में प्रकृति का जो रौद्र रूप दिख रहा है, उसने मानसून की भयावहता और आपदा प्रबंधन की स्थिति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दो दिन पहले पालघर में हुई मूसलाधार बारिश ने तबाही मचा दी थी। केवले के देवीपाडा क्षेत्र में मूसलाधार बारिश के कारण अचानक बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई और देखते ही देखते पानी घरों में घुसने लगा। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे एक आठ सदस्यों का परिवार, जिसमें महिलाएं और छोटे मासूम बच्चे शामिल हैं, अपनी जान बचाने के लिए घर की छत पर चढ़ गए हैं। चारों तरफ सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा है और बाढ़ का जलस्तर डरावनी गति से बढ़ रहा है, जिसने पूरे घर को जलमग्न कर दिया है।
यह दृश्य अत्यंत विचलित करने वाला है क्योंकि मूसलाधार बारिश के बीच, छोटे-छोटे बच्चे और उनके परिजन खुले आसमान के नीचे छत पर दुबक कर बैठे हैं। वीडियो में परिवार के सदस्यों के चेहरों पर साफ तौर पर मौत का खौफ देखा जा सकता है। जानकारी के मुताबिक, यह परिवार लगभग चार लंबे घंटों तक इसी तरह छत पर फंसा रहा। बाढ़ का पानी घर के चारों ओर इस कदर फैल गया था कि उनके पास वहां से सुरक्षित निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा था।
वीडियो के वायरल होने के साथ ही इस मामले में एक गंभीर पक्ष भी सामने आया है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि जब वे चार घंटे तक छत पर फंसे रहे और मदद के लिए गुहार लगाते रहे, तब उन्हें कोई भी बचाव सहायता या सरकारी मदद नहीं मिली। इतनी गंभीर स्थिति होने के बावजूद किसी भी रेस्क्यू टीम का वहां न पहुंचना सुरक्षा इंतजामों पर सवालिया निशान खड़ा करता है।
जब बारिश की रफ्तार कुछ कम हुई और बाढ़ का पानी उतरना शुरू हुआ, तब जाकर परिवार के सदस्य अपने मासूम बच्चों के साथ सुरक्षित नीचे उतर पाए। हालांकि इस घटना में सभी सदस्य सुरक्षित हैं, लेकिन उन चार घंटों की दहशत ने उन्हें बुरी तरह झकझोर दिया है।
यह भी पढ़ें: ओतूर मंडी में प्याज की कीमतों में जोरदार उछाल: गोळा प्याज 301 रुपये प्रति 10 किलो बिका; किसानों के चेहरे खिले
यह वीडियो अब इंटरनेट पर तेजी से फैल रहा है और लोग पालघर के इस परिवार की हिम्मत की दाद दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की सुस्ती की आलोचना भी की जा रही है। यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि मानसून के दौरान तटीय और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए स्थितियां कितनी जानलेवा हो सकती हैं।