सीएम देवेंद्र फडणवीस (फोटो- सोशल मीडिया) 
नासिक

Nashik Ring Road: मुआवजे पर किसानों को जगी उम्मीद, CM फडणवीस ने दिया बागायती जमीन के समान दर का आश्वासन

Nashik Ring Road project: नासिक रिंग रोड परियोजना के प्रभावित किसानों ने विधायकों के नेतृत्व में सीएम देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। सीएम ने बागायती जमीन के समान उचित मुआवजा देने का आश्वासन दिया।

रूपम सिंह

Nashik Ring Road project Devendra Fadnavis: प्रस्तावित रिंग रोड परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही कृषि भूमि के मुआवजे को लेकर प्रभावित किसानों को बड़ी उम्मीद जगी है। विधायक सीमा हिरे और विधायक राहुल ढिकले के नेतृत्व में किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुंबई स्थित मंत्रालय में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर अपनी समस्याओं को प्रमुखता से रखा। मुख्यमंत्री ने किसानों की मांगों को जायज बताते हुए इस पर जल्द ही ठोस नीतिगत निर्णय लेने का भरोसा दिलाया है।

प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख मांगें

बैठक के दौरान विधायकों और किसानों ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित बिंद रखे-भूमि अधिग्रहण के दौरान जिरायती और बागायती जमीन का भेद पूरी तरह समाप्त किया जाए। सभी प्रभावित किसानों को बागायती जमीन के समान संतोषजनक और भरपूर मुआवजा दिया जाए। मुआवजा राशि तय करते समय जमीनों के जिरायती बागायती या येलो-ग्रीन जैसे वर्गीकरण के बजाय किसानों के आर्थिक हितों को प्राथमिकता दी जाए। भूमि अधिग्रहण का गुणांक बढ़ाने की मांग की गई, ताकि किसानों को उनकी जमीन का उचित मूल्य मिल सके।

देवेंद्र फडणवीस ने दिया ठोस आश्वासन

प्रतिनिधिमंडल की दलीलों को गंभीरता से सुनते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि किसानों की चिंताएं उचित है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि किसानों के हितों की अनदेखी नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि मुआवजे की दरों के संबंध में सरकार जल्द ही एक सकारात्मक और किसान-हितैषी नीतिगत निर्णय लेगी, जिससे परियोजना प्रभावितों को न्याय मिल सके। इस शिष्टमंडल में पिंपलगांव बहुला और पाथर्डी गांव क्षेत्र के बड़ी संख्या में प्रभावित ग्रामीण और किसान शामिल रहे, जिन्होंने मुख्यमंत्री के इस रुख का स्वागत किया है।

किसानों में था गहरा असंतोष

रिंग रोड परियोजना के लिए पिपलगांव बहुला, पाथर्डी गांव और पूर्वी निर्वाचन क्षेत्र के कई गांवों की भूमि अधिग्रहित की जानी है। प्रशासन द्वारा में तय किए गए पूर्व मुआवजे की दरों से स्थानीय किसानों में गहरा असंतोष था, क्योंकि उनका मानना था कि वर्तमान दरें उनकी जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य और उनकी आर्थिक क्षति की भरपाई करने में नाकाफी है।

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