नासिक, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो ) 
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नासिक: फसलों को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए संशोधित बीमा योजना शुरू; 31 जुलाई आवेदन की अंतिम तिथि

Nashik PM Fasal Bima Yojana: नासिक में खरीफ सीजन के लिए PM संशोधित फसल बीमा योजना लागू हो गई है। किसान 31 जुलाई तक पंजीकरण कर सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि व अन्य प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा पा सकते है।

अंकिता पटेल

Kharif Crop Insurance Scheme: खरीफ सीजन की फसलों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए नासिक जिले में 'प्रधानमंत्री संशोधित फसल बीमा योजना' लागू कर दी गई है। इस योजना के तहत किसानों को 70 प्रतिशत जोखिम स्तर का सुरक्षा कवच प्रदान किया जाएगा।

बुवाई से लेकर कटाई तक के इस बीमा संरक्षण के लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गई है। जिले के लिए 'इफ्को टोकियो' कंपनी को बीमा का दायित्व सौंपा गया है। यह योजना किसानों के लिए पूरी तरह से स्वैच्छिक है, जिसमें ऋणी और गैर-ऋणी दोनों किसान भाग ले सकते हैं।

यहां तक कि पट्टे (बटाई) पर खेती करने वाले किसान भी अपना पंजीकृत किरायानामा पोर्टल पर अपलोड कर इस सुरक्षा कवच का लाभ उठा सकते हैं। सूखा, अत्यधिक वर्षा, बाढ़, ओलावृष्टि, चक्रवात, कीट और विभिन्न फसलों के रोगों से होने वाले नुकसान पर मुआवजा मिलेगा।

किफायती प्रीमियम

खाद्यान्न और तिलहन फसलों के लिए: 2 प्रतिशत प्रीमियम, नकदी फसलों (कपास/प्याज) के लिए: 5 प्रतिशत प्रीमियम, शेष प्रीमियम का भुगतान केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।

डिजिटल पंजीकरण और फार्मर आईडी की अनिवार्यता

सरकार ने पारदर्शिता के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल कर दिया है- योजना में शामिल होने के लिए 'ग्रीस्टैक फार्मर आईडी' अनिवार्य है। फसलों का सटीक पंजीकरण अनिवार्य है, जिससे प्रत्येक खेत की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध होगी। उत्पादन अनुमान में सटीकता और मानवीय त्रुटियों को कम करने के लिए सरकार के आधिकारिक 'सीसीई एग्री ऐप' का उपयोग अनिवार्य किया गया है।

धोखाधड़ी पर सख्त कार्रवाई

योजना में धांधली रोकने के लिए कड़े नियम बनाए गए है। यदि कोई किसान फर्जी दस्तावेज या झूठी जानकारी प्रस्तुत करता है, तो उसे फसल बीमा के साथ साथ अगले पांच वर्षों के लिए अन्य सभी सरकारी डीबीटी योजनाओं से अपात्र घोषित कर दिया जाएगा।

उत्पादन अनुमान की आधुनिक तकनीक

फसल उत्पादन का आकलन करने के लिए अब पुरानी पद्धतियों के साथ-साथ आधुनिक तकनीक को अपनाया जा रहा है। अब उत्पादन अनुमान में 50 प्रतिशत वेटेज 'फसल कटाई प्रयोगों' को और 50 प्रतिशत वेटेज सैटेलाइट, ड्रोन और रिमोट सेंसिंग से प्राप्त डेटा को दिया जाएगा, जिससे मुआवजे की प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष और विश्वसनीय बनेगी।

फसलवार बीमा संरक्षण एवं प्रीमियम विवरण (प्रति हेक्टेयर

फसल बीमा राशि (रु.) प्रीमियम (रु.)
खरीफ प्याज 85,000 4,250
कपास 63,000 3,150
सोयाबीन 62,000 1,240
धान (चावल) 56,000 1,120
तुअर (अरहर) 45,000 900
मक्का 44,000 880
खरीफ ज्वार 35,000 700
बाजरा 30,000 600
मूंग 25,000 500
उड़द 25,000 500

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