Nashik TCS Case Supreme Court Plea: सुप्रीम कोर्ट में पहले से धर्म परिवर्तन से जुड़ा एक स्वतः संज्ञान मामला चल रहा है। स्वतः संज्ञान का मतलब है कि अदालत ने खुद ही इस मुद्दे को संज्ञान में लिया था। अब नासिक के टीसीएस मामले को लेकर उसी केस में एक नई अर्जी दाखिल की गई है।
याचिका दाखिल करने वाले वकील ने अदालत में कहा कि नासिक का यह संगठित धर्म परिवर्तन का मामला पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख देने वाला है। याचिका में कई बड़े दावे और मांगें की गई हैं।
पहली बात यह कि जबरदस्ती या धोखे से धर्म बदलवाना देश के लिए एक गंभीर खतरा है। दूसरी बात यह कि जब यह काम किसी बड़े संगठित और दबाव बनाकर चलाए जा रहे अभियान के तहत होता है तो इसे 'आतंकवादी कृत्य' माना जाना चाहिए, तीसरी बड़ी बात यह कही गई है कि यह जबरन या धोखे से धर्म बदलवाना कोई अकेली धार्मिक घटना नहीं है बल्कि एक 'सुनियोजित षड्यंत्र' है। याचिका में दावा किया गया है कि इस षड्यंत्र को अक्सर विदेशी ताकतें पैसा देती हैं। इसका मकसद देश के धार्मिक जनसंख्या संतुलन को बदलना है, जिससे भारत की एकता, अखंडता और सुरक्षा को खतरा पैदा हो।
नासिक की टीसीएस कंपनी में महिला कर्मचारियों के साथ यौन शोषण और धर्मांतरण के लिए दबाव डालने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घटना से पूरे शहर में आक्रोश फैल गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए टीसीएस कंपनी के दिल्ली स्थित मुख्य कार्यालय दिल्ली से आई विशेष टीम ने कंपनी में पहुंचकर जांच शुरू की।
ये भी पढ़ें :- Ashok Kharat Case में बड़ा वित्तीय एंगल, जमीन खरीद और बिल्डरों से कनेक्शन की जांच तेज
चौंकाने वाली बात यह है कि इस मामले की मुख्य आरोपी निदा खान पिछले 20 दिनों से फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है। जांच के दौरान कामकाज प्रभावित न हो और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 150 कर्मचारियों को सोमवार से वर्क फ्रॉम होम करने के निर्देश दिए गए हैं।