आयुक्त शेखर सिंह व अन्य (फोटो नवभारत)
नासिक

सिंहस्थ कुंभ से बदलेगा नासिक का भविष्य, शेखर सिंह बोले- औद्योगिक विकास को मिलेगी नई रफ्तार

Nashik Simhastha Industrial Development: सिंहस्थ कुंभ के लिए नासिक में हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से उद्योग और निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। शेखर सिंह ने 15-20 साल की विकास योजना पर जोर दिया।

आलोक उमाकृष्ण

Simhastha Kumbh Infrastructure Investment: सिंहस्थ कुंभ मेला प्राधिकरण के आयुक्त शेखर सिंह ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा है कि कुंभ मेले की पृष्ठभूमि में नासिक में बड़े पैमाने पर हो रहा बुनियादी ढांचागत विकास शहर की औद्योगिक और आर्थिक प्रगति के लिए निर्णायक साबित होगा।

इसमें मुख्य रूप से शामिल एक्सप्रेसवे, रिंग रोड, बिजली, जलापूर्ति, सीवेज प्रबंधन, परिवहन और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्यों के चलते नासिक आने वाले समय में देश का एक महत्वपूर्ण निवेश और औद्योगिक विकास केंद्र बनेगा।

वे निमा सभागार में 'नासिक इंडस्ट्रीज एंड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन' (निमा) की ओर से उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ आयोजित बैठक में बोल रहे थे।

इन पदाधिकारीयों की रही उपस्थिति

इस अवसर पर मंच पर निमा अध्यक्ष आशीष नहार, उपाध्यक्ष मनीष रावल व किशोर राठी, सचिव राजेंद्र अहिरे, कोषाध्यक्ष राजेंद्र वडनेरे, संतोष मंडलेचा सहित कई गणमान्य व्यक्ति व पदाधिकारी उपस्थित थे।

शेखर सिंह ने आगे कहा कि सिंहस्थ कुंभ मेले के अवसर पर तैयार की जा रही बुनियादी सुविधाएं केवल कुंभ मेले तक सीमित न रहकर अगले 15 से 20 वर्षों को ध्यान में रखकर विकसित की जानी चाहिए।

प्रशासन, उद्योग जगत और आम नागरिकों के आपसी समन्वय से ही नासिक का सतत और सर्वसमावेशी विकास संभव हो सकेगा। इस अवसर पर निमा कार्यकारिणी के सदस्यों और उद्यमियों ने सिंहस्थ कुंभ मेले से जुड़े कार्यों पर विस्तृत चर्चा की।

आयुक्त ने दिया प्रतिक्रिया

सिंहस्थ कुंभ मेला प्राधिकरण के आयुक्त शेखर सिंह ने कहा कि रिंग रोड का निर्माण कार्य कुंभ मेले से पहले पूरा होने पर शहर में यातायात की भीड़ (ट्रैफिक जाम) और प्रदूषण कम होने के साथ-साथ माल ढुलाई भी अधिक सुगम हो जाएगी।

रिंग रोड के आसपास के क्षेत्रों का सुनियोजित विकास करते समय आईटी, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और एमएसएमई क्षेत्रों के लिए विशेष जोन विकसित करने का विचार आगामी विकास योजना में किया जाना आवश्यक है।

नदी प्रदूषण रोकने के लिए उद्योगों को भी पर्यावरणीय नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए। औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व देना अनिवार्य है।

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