सिंहस्थ कुंभ मेला (फोटो नवभारत) 
नासिक

नासिक में सिंहस्थ के नाम पर विकास या परेशानी? फिर दोहराई जाएगी स्मार्ट सिटी की कहानी, बढ़ा नागरिकों का संशय

Nashik Simhastha Development: सिंहस्थ विकास कार्यों पर नासिक में सवाल उठ रहे हैं। स्मार्ट सिटी के अधूरे वादों के बाद अब नागरिक गुणवत्ता, पारदर्शिता और समय पर काम पूरा होने को लेकर संशय में हैं।

आलोक उमाकृष्ण

Nashik Simhastha Development Smart City Comparison: नासिक में चल रहे सिंहस्थ कुंभ मेले के विकास कार्यों के लिए राज्य और केंद्र सरकार की ओर से लगभग 30 से 35 हजार करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। कुंभ मंत्री गिरीश महाजन ने दो दिन पहले सड़क मरम्मत कार्यों की समीक्षा बैठक में विश्वास जताया कि सभी परियोजनाएं पूरी होने के बाद नासिक एक आधुनिक, सुव्यवस्थित और विश्वस्तरीय शहर के रूप में विकसित होगा।

लेकिन दस वर्ष पहले स्मार्ट सिटी योजना के समय भी ऐसे ही दावे किए गए थे। यही कारण है कि सिंहस्थ के नाम पर चल रहे विकास कार्यों को लेकर नासिकवासियों में उम्मीद से ज्यादा संशय दिखाई दे रहा है। वर्ष 2016 में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी योजना के तहत नासिक का चयन किया गया था। इसके लिए नासिक म्युनिसिपल स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड का गठन किया गया।

शहर में आधुनिक बुनियादी सुविधाएं, स्मार्ट यातायात व्यवस्था, तकनीक आधारित प्रशासन, सौंदर्यीकरण और नागरिक केंद्रित विकास का सपना दिखाया गया। लेकिन करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद नासिकवासियों को अपेक्षित बदलाव देखने को नहीं मिला। कई परियोजनाएं अधूरी रह गईं, कुछकार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठे, जबकि अनेक योजनाओं का नागरिकों को कोई विशेष लाभ नहीं मिला।

लोगों के बीच व्यंग्य का विषय बना

परिणाम यह हुआ कि नासिक में स्मार्ट सिटी का नाम ही लोगों के बीच व्यंग्य का विषय बन गया। इसी अनुभव के कारण अब सिंहस्थ से जुड़े विकास कार्यों को भी नागरिक संदेह की नजर से देख रहे हैं। हजारों करोड़ रुपये की लागत से सड़कें, पुल, नदी तट विकास, जलापूर्ति, सीवरेज और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, लेकिन कार्यों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

पिछले कुछ महीनों से शहर की अधिकांश प्रमुख सड़कों पर बड़े पैमाने पर खुदाई जारी है. कई स्थानों पर गड्ढे खोदने के बाद उन्हें ठीक से नहीं भरा गया, जिससे नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ट्रैफिक जाम, धूल, कीचड़ और लगातार हो रहे सड़क हादसे आम बात बन चुके हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि इन गड्ढों के कारण हुए हादसों में अब तक पांच लोगों की जान जा चुकी है।

इन घटनाओं ने नागरिकों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। लोगों का कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर आम नागरिकों की सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है। सिंहस्थ परियोजनाओं में कथित कमीशनखोरी, गुजरात के ठेकेदारों को बड़े पैमाने पर काम दिए जाने तथा निविदा प्रक्रिया को लेकर भी पहले से चर्चा होती रही है। विपक्ष के साथ-साथ सामाजिक संगठनों ने भी इन मुद्दों पर सवाल उठाए हैं।

नागरिकों का यह है कहना

सिंहस्थ से पहले कम समय में बड़ी संख्या में परियोजनाएं पूरी करने का दबाव होने के कारण कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका भी व्यक्त की जा रही है। नागरिकों का कहना है कि यदि जल्दबाजी में काम पूरे किए गए और कुछ वर्षों में ही उनकी गुणवत्ता खराब हो गई, तो हजारों करोड़ रुपये खर्च करने का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा।

ऐसा नहीं है कि नासिकवासी विकास नहीं चाहते। बल्कि सभी चाहते हैं कि सिंहस्थ के अवसर पर शहर का समग्र विकास हो और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हों। लेकिन स्मार्ट सिटी के कड़वे अनुभव के बाद अब केवल बड़ी घोषणाओं, भारी-भरकम बजट और वादों पर लोगों का भरोसा नहीं रहा है।

इस बार सरकार और प्रशासन की असली परीक्षा कार्यों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्ध क्रियान्वयन से होगी। अन्यथा सिंहस्थ समाप्त होने के बाद फिर वही सवाल उठेगा कि हजारों करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन आखिर शहर को मिला क्या?

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