Nashik National Lok Adalat 2026: नासिक जिला विधी सेवा प्राधिकरण, नासिक की ओर से 14 मार्च 2026 को जिले में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन प्रमुख जिला एवं सत्र न्यायाधीश एस। डी. जगमलानी की अध्यक्षता में किया गया।
इस राष्ट्रीय लोक अदालत में जिले भर के कुल 16 हजार 826 मामलों का निपटारा किया गया। इन सभी मामलों में आपसी समझौते के आधार पर लगभग 86 करोड़ 94 लाख 89 हजार 133 रुपये की समझौता राशि वसूल की गई।
यह जानकारी दिवाणी न्यायाधीश (वरिष्ठ स्तर) तथा जिला विधी सेवा प्राधिकरण के सचिव सुहास भोसले ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी। 14 मार्च 2026 को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 55 पैनलों पर 32 हजार 975 लंबित तथा 80 हजार 267 पूर्व-दाखिल मामलों को सुनवाई के लिए रखा गया था। इनमें से 4 हजार 159 लंबित और 12 हजार 667 पूर्व-दाखिल मामलों का निपटारा एक ही दिन में लोक अदालत के माध्यम से किया गया।
मोटर दुर्घटना मामलों में भी कई महत्वपूर्ण मामलों का समझौते के माध्यम से निपटारा किया गया 9 जनवरी 2022 को मोटरसाइकिल और ट्रक के बीच हुए हादसे में मृत मोटरसाइकिल चालक के परिजनों को दुर्घटना क्षतिपूर्ति मामले में समझौते के तहत 73 लाख रुपये की भरपाई मिली, मृतक सेतीष जाधव मोटरसाइकिल से जा रहे थे, तभी मिर्ची होटल से सूरत की ओर तेज गति से जा रहे ट्रक की टक्कर से उनकी मृत्यु हो गई थी। पक्षकारों की आपसी सहमति से 73 लाख रुपये में समझौता कर मामला लोक अदालत में निष्टाया गया,
इसी तरह 15 जुलाई 2022 को पुलिस कॉन्स्टेबल मधुकर लक्ष्मण खुले सिन्नर से पांडुली चौफुली की ओर मोटरसाइकिल से जा रहे थे, तभी एक पिकअप जीप की टक्कर में उनकी मृत्यु हो गई। इस मामले में भी आपसी सहमति से 46 लाख 50 हजार रुपये की भरपाई तय कर मामला समाप्त किया गया। वहीं, 9 सितंबर 2024 को मोटरसाइकिल और क्रेन की टक्कर में सागर संपत कासार की मृत्यु हो गई थी। इस मामले में भी पक्षकारों की सहमति से 42 लाख 30 हजार रुपये में समझौता कर प्रकरण का निपटारा किया गया।
इसी प्रकार 23 जनवरी 2022 को अक्षय सुपेकर मोटरसाइकिल से बली मंदीकर से राजमाता मंगल कार्यालय की ओर जा रहे थे, तभी एक कार की टक्कर से वे घायल हो गए। इस दुर्घटना में वाहन मालिक और लिबर्टी इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ किए गए दावे का लोक अदालत में समझौता हुआ और सुपेकर को 94 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति प्रदान की गई।
40 दंपतियों का फिर बसा घर : लोक अदालत में पारिवारिक विवादों से जुड़े 3 हजार 173 मामलों की सुनवाई के लिए रखा गया था। इनमें से 40 मामलों में आपसी समझौते से विवाद समाप्त हुआ और दंपतियों का वैवाहिक जीवन फिर से शुरू हो सका।