प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
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नासिक मनपा चुनाव से पहले गठबंधनों में उथल-पुथल, सीट बंटवारे पर फंसी महायुति, भाजपा अकेले मैदान में?

MVA Alliance Crisis: नासिक मनपा चुनाव से पहले महायुति और महाविकास आघाड़ी में खींचतान तेज हो गई है। सीट बंटवारे पर असहमति से नए गठबंधन बन रहे हैं और पुराने समीकरण टूटते नजर आ रहे हैं।

अंकिता पटेल

Nashik Municipal Election Hindi News: नासिक आगामी नासिक महानगरपालिका चुनाव से पहले महायुति और महाविकास आघाड़ी दोनों ही गठबंधनों में गंभीर अंतर्विरोध सामने आ गए हैं।

सीटों के बंटवारे को लेकर सहमति न बन पाने से जहां पुराने गठबंधन टूटते नजर आ रहे हैं, वहीं नए राजनीतिक समीकरण तेजी से आकार ले रहे हैं। इससे नासिक की राजनीति में अनिश्चितता और रोमांच दोनों बढ़ गए हैं।

महायुति में शामिल शिवसेना (शिंदे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) ने मिलकर चुनाव लड़ने की रणनीति लगभग तय कर ली है। दोनों दलों का दावा है कि संयुक्त रूप से मैदान में उतरने से संगठनात्मक मजबूती मिलेगी।

हालांकि, इस फैसले के चलते भाजपा के साथ सीटों के बंटवारे पर सहमति नहीं बन पाई। परिणामस्वरूप भाजपा ने नासिक में अकेले चुनाव लड़ने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं और बूथ स्तर तक स्वतंत्र रणनीति तैयार करने पर काम शुरू कर दिया है।

उधर, महाविकास आघाड़ी में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) ने आपसी तालमेल बनाते हुए सीटों के बंटवारे का फार्मूला तय करने की कोशिश तेज कर दी है। वहीं, ठाकरे गुट ने मनसे के साथ गठबंधन का रास्ता अपनाने का फैसला किया है।

वोटों के बिखराव को लेकर उम्मीदवारों को सता रही चिंता

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नासिक महानगरपालिका चुनाव अब सीधे तौर पर चार-कोणीय मुकाबले में बदल गया है। भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट)- अजित पवार गुट गठबंधन, कांग्रेस-शरद पवार गुट और ठाकरे गुट-मनसे गठबंधन-इन चारों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा होने की संभावना है।

इससे न केवल वोटों का बिखराव होगा, बल्कि कई वार्डों में परिणाम आखिरी राउंड तक लटक सकते हैं। एक तरफ गठबंधनों की टूट-फूट से कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति है, तो दूसरी ओर सभी दलों ने प्रचार की धार तेज कर दी है।

स्थानीय मुद्दों, विकास कार्यों, नेतृत्व और संगठनात्मक ताकत के आधार पर मतदाताओं को साधने की कोशिशें शुरू हो चुकी है। कुल मिलाकर, सीटों के बंटवारे से उपजा यह राजनीतिक घमासान नासिक की सियासत को नई दिशा दे रहा है।

किस गठबंधन की रणनीति कारगर साबित होगी और किसे सत्ता का रास्ता मिलेगा, यह तो आने वाले दिनों और चुनावी नतीजों के बाद ही साफ होगा। फिलहाल इतना तय है कि नासिक महानगरपालिका चुनाव राज्य के सबसे चर्चित और हाई-वोल्टेज चुनावों में शुमार होने जा रहा है।

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