Nashik MLA Devyani Pharande Faces Row: नासिक मध्य विधानसभा क्षेत्र की विधायक देवयानी फरांदे से जुड़ा एक विवादित मामला सामने आया है। जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर विधायक के लिए नासिक पुलिस के एक तैनात कर्मचारी द्वारा छतरी पकड़ने की तस्वीर सामने आने के बाद यह मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है।
पुलिस सुरक्षाकर्मी से इस तरह निजी काम कराने की घटना को लेकर प्रशासनिक हलकों और जनता में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। ज्ञात हो कि विधायक देवयानी फरांदे राहुल गांधी के नासिक दौरे का विरोध करने के लिए आयोजित एक मोर्चे में शामिल होने के लिए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंची थीं।
महाराष्ट्र पुलिस मैनुअल, ब्लू बुक गाइडलाइन्स और पुलिस सेवा नियमों के स्पष्ट निर्देश हैं कि सुरक्षा में तैनात जवान का मुख्य कर्तव्य जनप्रतिनिधि की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और संभावित खतरों से बचाव करना है। नियम के अनुसार सुरक्षाकर्मी के दोनों हाथ और ध्यान हर समय किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सतर्क रहने चाहिए।
सुरक्षाकर्मी के हाथ में छतरी होने से उसकी सतर्कता और त्वरित प्रतिक्रिया देने की क्षमता प्रभावित होती है, जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद जोखिम भरा है। महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत वर्दीधारी अधिकारी से निजी सामान उठवाना या छतरी पकड़वाना पद के दुरुपयोग और सामंती मानसिकता को उजागर करता है।
लोकतंत्र में पुलिस बल का मुख्य कार्य कानून व्यवस्था को बनाए रखना है, न कि जनप्रतिनिधियों की तीमारदारी करना। इस तरह के आचरण से पुलिस विभाग की छवि धूमिल होती है और आम जनता का विश्वास कमजोर होता है, प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में शासकीय मर्यादा का साफ उल्लंघन हुआ है।
नासिक पुलिस आयुक्तालय को मामले का तुरंत संज्ञान लेकर संबंधित कर्मचारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी चाहिए और सख्त दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए ताकि वीआईपी सुरक्षा में तैनात जवान अपनी तय जिम्मेदारियों के अलावा किसी निजी सेवा में न लगाए जाएं।