Bombay High Court Order Cancelled: नासिक जिले में सारूल और राजूर बहुला क्षेत्र के 49 स्टोन क्रशरों के खिलाफ की गई कार्रवाई को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है।
कार्रवाई से पहले कारण बताओ नोटिस न दिए जाने के कारण, तहसीलदार द्वारा 26 जून को दिए गए आदेश को अदालत ने रद्द कर दिया है। इस न्यायिक आदेश के आधार पर बिजली आपूर्ति काटने और क्रशर को सील करने की प्रक्रिया रद्द हो गई है।
हालांकि, अदालत ने यह अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है कि क्रशर मालिकों की अनुमतियां वैध हैं या शिकायत निराधार है। शरद फाडोल सहित विभिन्न क्रशर मालिकों द्वारा दायर छह रिट याचिकाओं पर 29 सितंबर को न्यायमूर्ति अरुण आर. पेडनेकर की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई।
जिलाधिकारी ने 27 मई को गौण खनिज उत्खनन लाइसेंस निलंबित कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ अपील अतिरिक्त आयुक्त के समक्ष लंबित रहने के दौरान ही, तहसीलदार ने महाराष्ट्र राज्य बिजली वितरण कंपनी (महावितरण) के कार्यकारी अभियंता को पत्र भेजकर 49 क्रशरों की बिजली काटने और उन्हें सील करने के निर्देश दिए थे।
इसके खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि उन्हें कोई पूर्व नोटिस नहीं दिया गया था और इस कार्रवाई का खनन पट्टे से सीधा संबंध नहीं था। उच्च न्यायालय ने मामले को पुनः सुनवाई के लिए तहसीलदार के पास भेज दिया है और नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
सभी संबंधित पक्षों को 7 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3 बजे तहसीलदार के समक्ष उपस्थित होना होगा। याचिकाकर्ताओं को 12 अक्टूबर तक अपना पक्ष और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। इसके बाद दोनों पक्षों के बयानों और कागजात पर विचार कर तहसीलदार को कानून के तहत फैसला लेना होगा।
क्या तहसीलदार को इस तरह की कार्रवाई करने का अधिकार या क्षेत्राधिकार है, तथा मामले से जुड़े अन्य कानूनी पहलुओं पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने कोई अंतिम निर्णय नहीं सुनाया है। इन सभी मुद्दों को आगे की सुनवाई के लिए खुला रखा गया है। इसलिए, अदालत के इस आदेश को क्रशर मालिकों के लिए पूर्ण राहत नहीं माना जा सकता।