

Fodder Crisis 17 Lakh Livestock January Shortage: नासिक जिले में बारिश की भारी कमी के कारण 'ट्रिगर-1' के तहत 10 तहसीलों में सूखा घोषित किया गया है। एक तरफ जहां किसानों को फसलों के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं दूसरी तरफ उनके सामने अपने मवेशियों व पशुधन के पालन-पोषण की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन को पानी के साथ-साथ चारे का सटीक प्रबंधन कर जल्द से जल्द 'चारा छावनी' शुरू करनी पड़ेगी।
प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, जिले में फिलहाल उपलब्ध चारा केवल आगामी जनवरी महीने तक ही चल पाएगा। मानसून का सीजन खत्म होने के कगार पर है, जिससे जनवरी के अंत से ही चारे की भारी किल्लत पैदा होने की आशंका है। इसके चलते भीषण गर्मी के दिनों में चारे का गंभीर संकट गहराने का डर जताया जा रहा है।
नासिक जिले में कुल 17 लाख 46 हजार 373 पशुधन हैं। इनमें 7 लाख 28 हजार 87 गायें, 1 लाख 56 हजार 450 भैंसें, 1 लाख 11 हजार 551 बछड़े, 5 लाख 17 हजार 569 बकरियां और 2 लाख 47 हजार 178 भेड़ें शामिल हैं। इस पशुधन के लिए रोजाना लगभग 6 हजार 406 मीट्रिक टन चारे की आवश्यकता होती है।
इसके अलावा प्रतिदिन लगभग 36 करोड़ 88 लाख 5 हजार लीटर पानी की जरूरत पड़ती है।खरीफ सीजन से 15 लाख 44 हजार 605 किलो चारा उपलब्ध हुआ है। वर्ष 2025 में रबी सीजन से 25 लाख 4 हजार 284 किलो, जबकि वर्ष 2026 में गर्मियों के मौसम में भी चारा उपलब्ध हुआ था।
अगस्त के अंत तक नासिक जिले में 8 लाख 76 हजार 184 मीट्रिक टन चारा उपलब्ध था। जिले की दैनिक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह स्टॉक 137 दिनों, यानी करीब साढ़े चार से पांच महीने तक ही चल सकता है। इसलिए जनवरी के बाद चारे की उपलब्धता बनाए रखने के लिए प्रशासन को अभी से ठोस योजना बनानी होगी।
जिले के 17 लाख मवेशियों के लिए रोजाना लगभग 6,406 मीट्रिक टन चारे की जरूरत होती है। ऐसे में उपलब्ध स्टॉक और आने वाले सीजन में चारे के उत्पादन का संतुलन बनाना बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।
नांदगांव तहसील में कुल 1 लाख 82 हजार 424 पशुधन हैं, जिनके लिए प्रतिदिन 498 मीट्रिक टन चारे की आवश्यकता होती है। अगस्त के अंत तक तहसील में 46 हजार 622 मीट्रिक टन चारा उपलब्ध था, जो कि केवल नवंबर के अंत तक ही चल पाएगा।
वहीं सिन्नर तहसील में 1 लाख 54 हजार 526 पशुधन हैं और उनके लिए रोजाना 637 मीट्रिक टन चारे की जरूरत है। अगस्त के अंत में वहां 56 हजार 245 मीट्रिक टन चारा उपलब्ध था। आंकड़ों से स्पष्ट है कि सिन्नर तहसील में भी केवल दो से तीन महीनों का ही चारा स्टॉक बचा हुआ है।