Ashok Kharat Case Final Arguments On September: भविष्य बताने के नाम पर महिलाओं का यौन शोषण और आर्थिक धोखाधड़ी करने के गंभीर आरोपों से चर्चा में आए भोंदूबाबा अशोक खरात की जमानत याचिका पर सोमवार को नासिक जिला एवं सत्र न्यायालय में सुनवाई नहीं हो सकी।
आरोपी के वकील के अनुपस्थित रहने के कारण न्यायालय ने सुनवाई स्थगित कर दी। अब इस मामले में 16 सितंबर को दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें सुनी जाएंगी।
अशोक खरात के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार द्वारा गठित एसआईटी ने यौन शोषण और धोखाधड़ी के आठ अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। इनमें से छह मामले सत्र न्यायालय में स्थानांतरित हो चुके हैं, जबकि दो मामले अभी मजिस्ट्रेट कोर्ट में लंबित हैं।
इन दोनों मामलों को भी जल्द सत्र न्यायालय में स्थानांतरित किए जाने की संभावना है। सत्र न्यायालय में स्थानांतरित छह मामलों में से एक मामले में खरात ने जमानत के लिए आवेदन किया है।
दौरान एडवोकेट उज्ज्वल निकम व एडवोकेट अजय मिसर कोर्ट में उपस्थित थे। दोपहर करीब 12.30 बजे आरोपी के वकील की उपस्थिति के लिए पुकार की गई, लेकिन एडवोकेट राहुल कासलीवाल न्यायालय में मौजूद नहीं थे। उनके सहयोगियों ने न्यायालय से आधे घंटे का समय मांगा, जिसके चलते जमानत याचिका पर सुनवाई आगे बढ़ा दी गई।
सरकारी पक्ष की ओर से एडवोकेट उज्ज्वल निकम ने न्यायालय के समक्ष आरोपी अशोक खरात के खिलाफ गंभीर आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जानकारी रखी। निकम के अनुसार, खरात पर पीड़ित महिलाओं का कथित यौन शोषण करने के साथ-साथ उनके मन में डर और भय पैदा करने के आरोप हैं।
उन्होंने कहा कि इन आरोपों को साबित करने के लिए सरकार की ओर से न्यायालय के समक्ष पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश किए गए हैं। अभियोजन पक्ष का कहना है कि मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए जमानत याचिका पर निर्णय लेते समय इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखना आवश्यक है।