SIR का असर: छत्रपति संभाजीनगर में जिले में 6.08 लाख नाम प्रारूप सूची से हटे, अब दावे-आपत्तियों की बारी

SIR Voter List: छत्रपति संभाजीनगर जिले में SIR के बाद 6.08 लाख लोगों का नाम प्रारूप मतदाता सूची से बाहर हुए। 2.70 लाख पते पर नहीं मिले, जबकि 1.63 लाख शिफ्ट और 94 हजार मृत मिले।
SIR Changes Voter List In Sambhajinagar
SIR से संभाजीनगर में मतदाता सूची में बदलाव हुआ(फोटो नवभारत)
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SIR Changes Voter List In Sambhajinagar: भारत निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद जिले की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव सामने आया है। जिला निर्वाचन विभाग ने सोमवार को प्रारूप मतदाता सूची जारी की।

इसमें पहले दर्ज 32 लाख 16 हजार 907 मतदाताओं में से 26 लाख 8 हजार 507 मतदाताओं के नाम शामिल हैं। वहीं 6 लाख 8 हजार 400 नाम प्रारूप सूची से बाहर किए गए हैं। घर-घर सत्यापन में सबसे अधिक 2 लाख 70 हजार 960 मतदाता अपने दर्ज पते पर नहीं मिले।

इसके अलावा 1 लाख 63 हजार 645 मतदाता स्थायी रूप से स्थानांतरित और 94 हजार 169 मतदाता मृत पाए गए हैं। यह जानकारी उपजिलाधिकारी सविता चौधर ने दी।

3264 बीएलओ ने किया घर-घर सत्यापन

एसआईआर के दूसरे चरण की शुरुआत 30 जून से की गई थी। जिले में मतदाता सूची के सत्यापन के लिए 3264 मतदान केंद्र स्तरीय अधिकारियों यानी बीएलओ को लगाया गया था। अधिकारियों ने घर-घर जाकर मतदाताओं के पते और उपलब्ध जानकारी का सत्यापन किया।

मतदाताओं को गणना प्रपत्र दिए गए और प्राप्त जानकारी को ऑनलाइन दर्ज करने की प्रक्रिया भी पूरी की गई। अभियान की शुरुआत में गणना प्रपत्रों का वितरण तेजी से हुआ, लेकिन ऑनलाइन जानकारी दर्ज करने की गति अपेक्षाकृत धीमी रही। काम में तेजी लाने के लिए समय सीमा बढ़ानी पड़ी।

पहले 30 जुलाई तक काम पूरा करना था। इसके बाद समय सीमा 8 अगस्त और फिर 17 अगस्त तक बढ़ाई गई। अंतिम समय सीमा समाप्त होने के बाद सभी क्षेत्रों से रिपोर्ट लेकर प्रारूप सूची तैयार की गई।

सबसे अधिक मतदाता अपने पते पर नहीं मिले

पते पर नहीं मिले मतदाताओं की संख्या शहरी विधानसभा क्षेत्रों में सबसे अधिक रही। पूर्व विधानसभा क्षेत्र में 77,712, मध्य में 69,666 और पश्चिम में 59,209 मतदाता अपने दर्ज पते पर नहीं मिले।

ग्रामीण क्षेत्रों में फुलंब्री में 27,597, गंगापुर में 18,268, पैठण में 7,333, सिल्लोड में 4,890 और कन्नड़ में 4,330 मतदाता सत्यापन के दौरान नहीं मिले।

1.63 लाख मतदाता स्थायी रूप से जा चुके

सत्यापन में 1 लाख 63 हजार 645 मतदाताओं के स्थायी रूप से स्थानांतरित होने की जानकारी सामने आई। यानी पुराने पते पर दर्ज बड़ी संख्या में मतदाता अब दूसरे स्थानों पर रह रहे हैं। वहीं 94 हजार 169 मतदाताओं की मृत्यु होने की जानकारी मिली है।

इस प्रक्रिया में दोहरी प्रविष्टियों और जिन मतदाताओं की आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी, उन्हें भी अलग श्रेणी में रखा गया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची में पुरानी और दोहराई गई प्रविष्टियों को हटाकर वास्तविक मतदाताओं की संख्या स्पष्ट करना है।

महिलाओं के नाम अधिक संख्या में बाहर

प्रारूप सूची से बाहर किए गए 6 लाख 8 हजार 400 मतदाताओं में 3 लाख 9 हजार 93 महिलाएं, 2 लाख 98 हजार 505 पुरुष और 59 अन्य मतदाता शामिल हैं। महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक है। हालांकि, इन आंकड़ों को अंतिम मतदाता सूची में नाम हटने के रूप में नहीं देखा जा सकता।

प्रारूप सूची के बाद दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया होगी। जो वास्तविक मतदाता छत्रपति संभाजीनगर में जिले में मौजूद हैं, लेकिन सत्यापन के दौरान उनकी जानकारी दर्ज नहीं हो सकी, उन्हें दोबारा नाम दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा।

विधानसभा क्षेत्रों में अलग-अलग तस्वीर

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सिल्लोड में पते पर नहीं मिले 4,890, स्थायी रूप से स्थानांतरित 18,888, दोहरी प्रविष्टि वाले 10,410, मृत 12,881 और जानकारी नहीं मिलने वाले 200 मतदाता हैं।

कन्नड़ में इन पांच श्रेणियों के आंकड़े क्रमशः 4,330, 14,768, 3,748, 7,135 और 35 हैं। फुलंब्री में 27,597, 18,335, 9,472, 10,931 और 115 हैं।

मध्य में 69,666, 24,309, 9,947, 11,788 और 374 तथा पश्चिम में 59,209, 26,872, 10,290, 11,156 और 547 मतदाता इन श्रेणियों में हैं।

पूर्व में 77,712, 14,308, 13,157, 10,406 और 358; पैठण में 7,333, 14,220, 5,340, 11,467 और 130; गंगापुर में 18,268, 19,758, 9,503, 9,643 और 59 मतदाता संबंधित श्रेणियों में दर्ज किए गए हैं।

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दावे-आपत्तियों के बाद साफ होगी अंतिम तस्वीर

एसआईआर के जरिए मतदाता सूची की व्यापक जांच पूरी होने के बाद अब अगला महत्वपूर्ण चरण दावे और आपत्तियों का है। निर्वाचन विभाग के सामने चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि मृत, स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्टियां हटाने के साथ-साथ किसी वास्तविक मतदाता का नाम गलती से बाहर न रह जाए।

प्रारूप सूची में शामिल और बाहर किए गए नामों की जांच के बाद अंतिम मतदाता सूची की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

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