त्र्यंबकेश्वर में बन रहा साधू ग्राम सोर्स: सोशल मीडिया
महाराष्ट्र

नासिक सिंहस्थ कुंभ में आएंगे 1 लाख से ज्यादा नागा संन्यासी, त्र्यंबकेश्वर में 200 एकड़ में बनेगा साधु ग्राम

Trimbakeshwar Kumbh Mela: महाराष्ट्र सरकार त्र्यंबकेश्वर में 200 एकड़ में साधु ग्राम बसाने जा रही है, जहां 1 लाख से अधिक नागा संन्यासियों और लाखों श्रद्धालुओं के लिए करोड़ों के भव्य पंडाल बनाए जाएंगे।

रामबाबू चौबे, मनीषा बोंदरे

Trimbakeshwar Kumbh Mega Plan: महाराष्ट्र सरकार और मेला विकास प्राधिकरण नासिक के त्र्यंबकेश्वर में 200 एकड़ से अधिक जमीन पर साधु ग्राम बसाने की तैयारी कर रहे हैं।

इस बार लाखों श्रद्धालुओं के साथ 1 लाख से अधिक नागा संन्यासियों के पहुंचने की संभावना है, जबकि करोड़ों रुपये के भव्य पंडाल भी आकर्षण का केंद्र बनेंगे।

करोड़ों के पंडाल बनेंगे आकर्षण

देश के अन्य कुंभों में संन्यासी अखाड़ों के भव्य पंडाल हमेशा आकर्षण का केंद्र रहे हैं। प्रयागराज, हरिद्वार और उज्जैन में जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी के पंडाल विशेष चर्चा में रहे हैं। प्रयागराज महाकुंभ में उनका पंडाल करीब 20 एकड़ में बनाया गया था, जिसकी अनुमानित लागत 8 से 10 करोड़ रुपये बताई गई थी। निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी का पंडाल भी करीब 6 एकड़ में बना था।

नासिक के त्र्यंबकेश्वर कुंभ का साधु ग्राम

कुंभ के लिए ऐतिहासिक तैयारी

सिंहस्थ कुंभ को ऐतिहासिक और भव्य बनाने के लिए महाराष्ट्र सरकार की ओर से बड़े स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। मेला विकास प्राधिकरण के माध्यम से पहले ही बड़े बजट का प्रावधान किया गया है। अब त्र्यंबकेश्वर में पहली बार 200 एकड़ से अधिक जमीन का अधिग्रहण कर साधु ग्राम बसाने की तैयारी की जा रही है। इसका उद्देश्य संन्यासी अखाड़ों को पर्याप्त जगह और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

अखाड़ों को मिलेगी पर्याप्त जगह

नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला में संन्यासी अखाड़ों को लंबे समय से जगह और सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ता रहा है। इसी वजह से कई बड़े संत और महामंडलेश्वर किराए के मकानों में रहने को मजबूर होते हैं। इस बार सरकार और मेला विकास प्राधिकरण सभी संन्यासी अखाड़ों को उनकी आवश्यकता के अनुसार जमीन और सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे हैं। इससे अखाड़ों में उत्साह का माहौल है और तैयारियां तेज हो गई हैं।

शाही स्नान की पुरानी परंपरा

1789-1790 के कुंभ मेले के दौरान शाही स्नान के अधिकार को लेकर शैव संन्यासी और वैष्णव संप्रदायों के बीच हिंसक टकराव हुआ था। इसके बाद शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए तत्कालीन मराठा पेशवा सवाई माधवराव ने दोनों संप्रदायों के स्नान स्थलों को स्थायी रूप से अलग कर दिया था। इसके बाद संन्यासी अखाड़े पहले चक्रतीर्थ और बाद में त्र्यंबकेश्वर में शाही स्नान के लिए आने लगे।

नासिक के त्र्यंबकेश्वर में कुंभ मेला पहुचें नागा संन्यासी

कुंभ मेला पहुचें नागा संन्यासी

कुंभ मेले में नागा संन्यासी सबसे बड़े आकर्षणों में शामिल होते हैं। मीडिया कवरेज में उनके रहन-सहन, साधना और परंपराओं को विशेष स्थान मिलता है। पिछले आयोजनों में त्र्यंबकेश्वर में सीमित संख्या में नागा संन्यासी दिखाई देते थे, लेकिन इस बार सरकार द्वारा जमीन और सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी से संख्या में बड़ा इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है।

त्र्यंबकेश्वर में दिखेगा भव्य नजारा

अनुमान के मुताबिक इस बार 1 लाख से अधिक नागा संन्यासियों के त्र्यंबकेश्वर पहुंचने की संभावना है। साधु ग्राम में अखाड़ों के भव्य पंडाल, धूनी रमाते साधु और चिमटा बजाते नागा संन्यासियों की मौजूदगी कुंभ का प्रमुख आकर्षण बन सकती है। सरकार की तैयारियों से इस बार त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ को पहले की तुलना में कहीं अधिक भव्य स्वरूप मिलने की उम्मीद है।

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