नासिक कुंभ मेले में पहली बार संन्यासी अखाड़ों में दो -दो हाथ, दोनों गुटों के साथ पांच-पांच अखाड़े

Nashik Kumbh Mela: नासिक कुंभ 2026-27 में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर संन्यासी अखाड़ों के दो गुट आमने-सामने हैं। दोनों गुटों के साथ पांच-पांच अखाड़े होने से मुकाबला बराबरी का बन गया है।
nashik kumbh 2026 27 sannyasi akhara dominance battle
नासिक कुंभ(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Nashik Sannyasi Akharas: नासिक कुंभ मेले के इतिहास के पन्नों को पलटने पर कई खूनी संघर्ष का उल्लेख मिलता है लेकिन यह लड़ाई संन्यासी और बैरागियों के बीच ही आज तक होती रही है लेकिन इस बार के कुंभ में त्रंबकेश्वर के मैदान में आमने-सामने वर्चस्व की लड़ाई लड़ने के लिए सन्यासी अखाड़े तैयार हैं और दोनों गुटों के साथ पांच-पांच अखाड़े खड़े हैं जिसको देखकर यह कहा जा सकता है कि इस बार संन्यासी अखाड़ों के दोनों गुटों में बराबरी का मुकाबला है जिसके कारण जंग रोचक और घमासान होने की संभावना है। नासिक कुंभ मेले में सन्यासी और बैरागी साधु संतों के बीच कई बार खूनी संघर्ष की गाथा लिखी जा चुकी है लेकिन इस बार 2026- 27 के कुंभ में जंग के मैदान में आमने-सामने सन्यासी अखाड़े ही है।

यहां पर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष को लेकर निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रवींद्र पुरी और महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव महंत रवींद्र पुरी अपने-अपने बहुमत का दावा ठोक रहे हैं। किसके पास कितना बहुमत है इसका फैसला तो कुंभ के दौरान ही पता चलेगा लेकिन दोनों अखाड़े त्रयंबकेश्वर में ही मौजूद है जिसके कारण यह भी कहा जा सकता है कि इस बार त्रंबकेश्वर की लड़ाई का मुख्य मैदान बनेगा फिलहाल देखा जाए तो न्यू वर्तमान अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रविंद्रपुरी के साथ जूना आवाहन अग्नि निरंजन और आनंद अखाड़े हैं तो निर्वाचित अध्यक्ष महानिर्वाणी के महंत रवींद्र पुरी के पास महानिरवादी अटल बड़ा उदासीन नया उदासीन और निर्मल अखाड़े साथ में है।

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संन्यासी अखाड़ों के बीच शक्ति प्रदर्शन

उक्त सभी अखाड़े से संप्रदाय के हैं जिन्हें सन्यासी अखाड़ा कहा जाता है और ऐसा कुंभ के इतिहास में पहली बार हो रहा है जब अध्यक्ष पद के लिए संन्यासी अखाड़ों में वर्चस्व की जंग छिड़ी हुई हो इसके पहले कुंभ में निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत नरेंद्र गिरी और निर्मोही अखाड़े के अध्यक्ष महंत ज्ञान दास के बीच अध्यक्ष पद के वर्चस्व की जंग हुई थी जिसमें नरेंद्र गिरी को सफलता मिली थी लेकिन इस बार संन्यासी अखाड़ों में से दो सबसे मजबूत और दबंग अखाड़े के आमने-सामने होने के कारण किसका पलड़ा भारी पड़ेगा इसका अनुमान अभी से लगाना सही नहीं है।

किसका पलड़ा भारी?

यहां पर यह बता दिया जाए कि वर्तमान में सनातन धर्म के 13 अखाड़े हैं जिसमें से 10 शैव संप्रदाय सन्यासी अखाड़े हैं तो वही तीन वैष्णो संप्रदाय बैरागी अखाड़े हैं नासिक कुंभ में सहयोग संप्रदाय के 10 अखाड़े त्रंबकेश्वर में अपना तंबू डेरा लगते हैं तो बैरागी अखाड़े तपोवन में यही कारण है कि देशभर में चार जगह पर लगने वाले कुंभ में नासिक की झलक सबसे अलग दिखाई पड़ती है क्योंकि यहां पर त्रंबकेश्वर और नासिक तपोवन मैं अलग-अलग धर्म ध्वज की स्थापना की जाती है और अखाड़ों की लड़ाई पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का मानना है कि अखाड़ा परिषद अध्यक्ष पर छिड़ी वर्चस्व की जंग का असर 31 अक्टूबर को धर्म ध्वज की स्थापना के दिन जरूर दिखाई पड़ेगा नासिक तपोवन में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के रूप में किस वस्तु को बुलाया जाता है मंच पर यह अभी से सवाल बना हुआ है तो त्रंबकेश्वर में क्या दोनों गुटे एक साथ प्रशासन के हाथ में हाथ रखकर धर्म राजा की स्थापना में सहयोग करेंगे या कौन मंच पर बैठेगा और कौन नहीं इसकी लड़ाई जारी रहेगी ?

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