

625 Employees Sent Back To Parent Departments: मंत्री कार्यालयों में नियमों के खिलाफ काम कर रहे 625 अधिकारी-कर्मचारियों को कार्यमुक्त कर उनके मूल विभागों में भेज दिया गया है।
सामान्य प्रशासन विभाग के 25 अगस्त के आदेश के अनुसार यह कार्रवाई की गई है। इनमें निजी सचिव, विशेष कार्य अधिकारी, निजी सहायक, लिपिक और चपरासी समेत अन्य कर्मचारी शामिल हैं।
कार्यवाही के बाद संबंधित कर्मचारियों के मंत्रालय प्रवेश पहचान पत्र जमा कराने और चेहरे से पहचान कर प्रवेश देने की सुविधा बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, इन कर्मचारियों की नियुक्ति अस्थायी रूप से दूसरे विभाग से बुलाकर या मौखिक आदेश के आधार पर की गई थी। सरकारी नियमों में इस तरह की नियुक्ति का प्रावधान नहीं है।
मुख्यमंत्री सचिवालय और मंत्रियों के कार्यालयों के लिए कुल 904 पद मंजूर हैं। इनमें 549 पदों पर अधिकारी-कर्मचारियों की नियुक्तियां की गई हैं, जबकि 355 पद अभी भी रिक्त हैं। इसके बावजूद मंजूर पदों की संख्या से अधिक कर्मचारियों को मंत्री कार्यालयों में तैनात किए जाने का मामला सामने आया है।
बताया जा रहा है कि कई कर्मचारियों को नियमों से हटकर दूसरे विभागों से अस्थायी रूप से बुलाया गया था। अतिरिक्त नियुक्तियों के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने ऐसे कर्मचारियों को कार्यमुक्त कर उनके मूल विभागों में भेजने की कार्रवाई शुरू की है। इससे मंत्री कार्यालयों में अनधिकृत नियुक्तियों पर रोक लगने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री कार्यालयों से संबंधित रिपोर्ट अभी तक सामान्य प्रशासन विभाग को प्राप्त नहीं हुई है। इसके अलावा वन मंत्री गणेश नाईक और स्कूली शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे के कार्यालयों की रिपोर्ट भी लंबित बताई गई है।
इन रिपोर्टों के मिलने के बाद संबंधित कार्यालयों में स्वीकृत पदों और वास्तविक नियुक्तियों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। 4 जनवरी 2025 के सरकारी निर्णय के अनुसार मुख्यमंत्री सचिवालय के लिए 164 पद, उपमुख्यमंत्री कार्यालय के लिए 72 पद मंजूर किए गए हैं।
वहीं मंत्री कार्यालय के लिए 16 और राज्य मंत्री कार्यालय के लिए 14 पद स्वीकृत हैं। अब अतिरिक्त नियुक्तियों की जांच के बीच इन कार्यालयों की रिपोर्ट पर भी नजर बनी हुई है।