नागपुर स्थित विधान भवन (सोर्स: सोशल मीडिया) 
नागपुर

नागपुर में ही क्यों होता है महाराष्ट्र विधानसभा का शीतकालीन सत्र? जानिए क्या है इसके पीछे का इतिहास

Maharashtra Winter Session: महाराष्ट्र विधानसभा का शीतकालीन सत्र 8-14 दिसंबर तक नागपुर में होगा। सबके मन में एक सवाल है कि महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई है, फिर विंटर सेशन नागपुर में ही क्यों होता है?

आकाश मसने

Why Winter Session Is Held in Nagpur: महाराष्ट्र विधानसभा का शीतकालीन सत्र नागपुर में 8 दिसंबर से 14 दिसंबर तक आयोजित किया जाएगा। 7 दिनों तक चलने वाले इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधायी और प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। सभी की निगाहें अहम प्रस्तावों और नीतियों पर टिकी हैं। इस बीच सबके मन में एक सवाल उठ रहा है कि महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई है और सभी सत्र वहां होते हैं। फिर शीतकालीन सत्र नागपुर शहर में ही क्यों होता है? तो आइए जानते हैं इसके पीछे का इतिहास।

102 साल तक राजधानी रहा था नागपुर

नागपुर ने लंबे समय तक एक प्रमुख प्रशासनिक केंद्र के रूप में कार्य किया है। 1854 से 1956 तक, यानी पूरे 102 साल तक, नागपुर ब्रिटिश नागपुर प्रांत की राजधानी थी। दिसंबर 1953 में, देश का पहला राज्य पुनर्गठन आयोग (State Reorganization Commission) जस्टिस फजल अली की अध्यक्षता में बनाया गया था। यह आयोग ऐसे समय में बना जब महाराष्ट्र के निर्माण को लेकर कांग्रेस नेताओं में उलझन थी। इस उलझन को सुलझाने के लिए, डॉ. एस. एम. जोशी ने इन सभी विपक्षी पार्टियों का नेतृत्व स्वीकार किया और संयुक्त महाराष्ट्र परिषद बनाई। यह तय किया गया कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों के नेताओं को एक साथ आकर इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए। इसी उद्देश्य से सितंबर 1953 में राज्य के सभी प्रतिनिधि नागपुर में इकट्ठा हुए थे।

1953 का ऐतिहासिक नागपुर समझौता

नागपुर समझौता 28 सितंबर 1953 को हुआ था। इस समझौते को साकार करने में धर्मवीर भाऊसाहेब हीरे ने अहम भूमिका निभाई थी। यह समझौता महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों के नेताओं द्वारा हस्ताक्षरित किया गया था। पश्चिम महाराष्ट्र के लिए भाऊसाहेब हीरे, यशवंतराव चव्हाण, नाना कुंटे और देवकीनंदन नारायण ने साइन किए थे। महा विदर्भ के लिए आर के पाटिल, रामराव देशमुख, पंजाबराव देशमुख और शेषराव वानखेड़े ने इस पर हस्ताक्षर किए थे। वहीं, मराठवाड़ा के लिए देवी सिंह चव्हाण, लक्ष्मण भटकर और प्रभावती देवी जकतदार ने साइन किए थे।

नागपुर स्थित पुराना विधान भवन (सोर्स: सोशल मीडिया)

समझौते में शामिल थे ये प्रमुख मुद्दे

नागपुर समझौते में राज्य के रीस्ट्रक्चरिंग और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे। समझौते के तहत, राज्य के रीस्ट्रक्चरिंग पर विचार करने के लिए एक हाई पावर कमेटी बनाई जानी थी। यह भी तय हुआ कि मुंबई, मध्य प्रदेश और हैदराबाद के मराठी बोलने वाले लोगों को एक साथ लाकर एक स्वतंत्र महाराष्ट्र राज्य बनाया जाना चाहिए और इसकी राजधानी मुंबई होनी चाहिए। इसके अलावा, स्टेट गवर्नमेंट की एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस के लिए, राज्य में तीन एडमिनिस्ट्रेटिव डिवीजन होने चाहिए: महा विदर्भ, मराठवाड़ा और बाकी महाराष्ट्र। न्यायिक व्यवस्था के संबंध में यह निर्णय लिया गया कि स्टेट के हाई कोर्ट का मेन सेंटर बॉम्बे में होना चाहिए और सब-सेंटर नागपुर को चुना गया। सरकारी और सेमी-गवर्नमेंट सर्विस में कैंडिडेट की भर्ती और स्टेट लेजिस्लेचर में लोगों का रिप्रेजेंटेशन आबादी के हिसाब से होना तय हुआ।

स्टेट रीऑर्गेनाइजेशन कमीशन का गठन

दिसंबर 1953 में, नागपुर एग्रीमेंट के मामलों पर विचार करते हुए, सेंट्रल गवर्नमेंट ने तय किया कि स्टेट को रीऑर्गेनाइज़ करने के लिए कुछ ठोस किया जाना चाहिए। इसी उद्देश्य से, दिसंबर 1953 में जस्टिस सैयद फज़ल अली की चेयरमैनशिप में एक स्टेट रीऑर्गेनाइजेशन कमीशन बनाया गया। जब अक्टूबर 1955 में उस कमीशन की रिपोर्ट आई, तो 1956 के बाद भाषा के हिसाब से रीजनलाइजेशन लागू हुआ।

नागपुर में विंटर सेशन होने का मुख्य कारण

नागपुर में विंटर सेशन आयोजित करने की परंपरा नागपुर समझौते से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है, और यह शहर के ऐतिहासिक महत्व को बनाए रखने का प्रयास था।

1956 में, फजल अली कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक, विदर्भ और विदर्भ के आठ जिलों को CP और बरार से अलग कर दिया गया था। 10 अक्टूबर, 1956 को नागपुर की लेजिस्लेटिव असेंबली में गवर्नर का मैसेज पढ़ा गया, जिसमें कहा गया था कि आज से असेंबली भंग कर दी गई है। 1953 में हुए एग्रीमेंट के मुताबिक, नागपुर को अपनी राजधानी का दर्जा खोना पड़ा।

एक सेशन नागपुर में होना जरूरी

इस स्थिति को और खराब न करने के लिए, 1953 के एग्रीमेंट में यह नियम बनाया गया कि यूनाइटेड महाराष्ट्र का एक सेशन साल में कम से कम एक बार नागपुर में होना चाहिए। यह नियम इसलिए बनाया गया ताकि राजधानी का दर्जा खोने के बावजूद नागपुर की प्रशासनिक और राजनीतिक महत्ता बनी रहे। इस समझौते के मुताबिक, 1960 के पहले सेशन का विंटर सेशन नागपुर में हुआ था। इसके बाद, हर साल राज्य विधानमंडल का शीतकालीन सत्र नागपुर में होता है।

यह परंपरा एक तरह से राजनीतिक वादे को निभाने का प्रतीक है, जिसमें ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों को राज्य की विधायी प्रक्रिया में लगातार प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाता है।

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