Nagpur Water Crisis Sanitation Issue: नागपुर में 45 डिग्री सेल्सियस के भीषण तापमान में झुलस रहे शहर में अब धीरे-धीरे बढ़ते जा रहे जल संकट ने नागरिकों का हाल बेहाल कर दिया है। शहर के उत्तर, पश्चिम और मध्य नागपुर की कई बस्तियों में कम दबाव और दूषित जलापूर्ति की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं।
विपक्ष के नेता संजय महाकालकर द्वारा बुलाई गई बैठक में कांग्रेस पार्षदों ने मनपा के जलप्रदाय विभाग के अधिकारियों को इस अव्यवस्था के लिए जमकर फटकार लगाई, प्रभाग क्रमांक 2 के पार्षद दिनेश यादव ने अपने क्षेत्रों की समस्या रखते हुए बताया कि संन्यालनगर, सहयोगनगर और भदंत आनंद कौशल्यायननगर में नलों से गंदा पानी आ रहा है। इसके अलावा म्हाडा कॉलोनी, काशीनगर और केजीएम सोसाइटी में जलापूर्ति का दबाव बहुत कम है।
पार्षद भावना लोणारे ने जानकारी दी कि रिपब्लिकननगर, ठवरेनगर और मिसाल ले-आउट में नलों से बदबूदार पानी आ रहा है। उन्होंने मांग की है कि पुरानी जलवाहिनी का कनेक्शन बंद करके लोगों को नई जलवाहिनी से जोड़ा जाए, वहीं प्रभाग 10 की पार्षद सरस्वती सलामे ने बोरगांव, दशरथनगर और आर्यनगर में कम दबाव की शिकायत की, जबकि प्रभाग 17 के रामनगर में पानी की कमी का मुद्दा पार्षद सुहास ननवटकर ने उठाया। पार्षद शैलेश पांडे ने भी अधिकारियों को असड़े हाथों लिया।
शहर के कुछ हिस्सों में स्थिति काफी खराब है। मोमिनपुरा क्षेत्र और प्रभाग 8 में बीते कुछ दिनों से नलों में एक बूंद पानी नहीं आया है जिस कारण लोगों के पास शौचालय जाने तक के लिए पानी नहीं है और उन्हें मजबूरन पड़ोसियों के घर जाना पड़ रहा है। पार्षद वसीम ने 40-50 परिवारों की यह व्यथा व्यक्त करते हुए तीखा सवाल किया कि टॉयलेट के लिए पानी नहीं होगा तो हम जिएंगे कैसे? उत्तर नागपुर के इंदौरा, नारी, जरीपटका और बेझनबाग जैसे कई इलाकों में पीला और दुर्गंधयुक्त पानी आ रहा है।
इस गंदी जलापूर्ति के कारण छोटे बच्चों में उल्टी और दस्त का प्रकोप काफी बढ़ गया है। नागपुर मनपा प्रशासन लोगों को 'पानी उबालकर पीने' को सलाह दे रहा है लेकिन इस पर नागरिकों ने अपना भारी आक्रोश जताते हुए पूछा है कि जब नलों में पानी ही नहीं आ रहा है तो उसे उचालेंगे कैसे?