Nagpur Voter List Special Intensive Revision: उत्सव की तरह चले SIR अभियान को जिले के ग्रामीण भागों में तो अच्छा प्रतिसाद मिला लेकिन शहर के 6 विधानसभा क्षेत्रों में आंकड़े इसकी असफलता की कहानी खुद कह रहे हैं। एसआईआर के आंकड़े जारी हो गए हैं और जिले के कुल 46,38,589 मतदाताओं में से 14,43,511 वोटर्स के नाम वोटिंग लिस्ट से इसलिए बाहर हो गए हैं क्योंकि इनके फॉर्म ही जमा नहीं हुए।
हालत यह है कि मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के विधानसभा क्षेत्र दक्षिण-पश्चिम नागपुर में बीते विस चुनाव में वे जितने वोटों से जीते थे। उससे करीब 4 गुना वोटर्स सूची से बाहर हैं। 2024 के विस चुनाव में फडणवीस ने अपने कांग्रेसी प्रतिद्वंद्वी प्रफुल गुड़धे को 39,710 वोटों से पराजित किया था। एसआईआर की जारी सूची में उनकी सीट से 1,54,005 वोटर्स के नाम सूची से बाहर हो गए हैं जो इस क्षेत्र के कुल मतदाताओं का 37/35 प्रतिशत हैं।
सिटी में वोटर्स की कुल संख्या 24,47,882 है जिनमें से 9,22,678 वोटर्स के नाम शामिल नहीं हो पाए हैं। प्रशासन ने छूट गए वोटर्स को अपना नाम जुड़वाने के लिए और 1 महीने का समय दिया है लेकिन बीएलओ, बीएलए और नागरिकों की भी इस संदर्भ में दिख रही उदासीनता के चलते संदेह जताया जा रहा है कि 15-20 प्रतिशत नाम और जुड़ सकते हैं।
कांग्रेस सहित विपक्षी दल के नेता आरोप लगाते रहे हैं कि सत्ताधारी बीजेपी के इशारे पर अन्य राज्यों में भी उनके वोटर्स सूची से गायब करने का खेल खेला गया है। क्या महाराष्ट्र में भी आरोपों का दौर शुरू होगा। फिलहाल पार्टियां यह अध्ययन करने में लगी हैं कि उनके वोट बैंक को तो खाली नहीं किया गया।
नागपुर सिटी की सभी 6 सीटों में 37 से 40 फीसदी वोटर्स के नाम सूची से बाहर हो गए हैं। निश्चित तौर पर बवाल तो मचना ही है। फिलहाल तो सभी दल छूट गए मतदाताओं के नाम सूची में जुड़वाने का प्रयास करेंगे।
यह भी देखा जाएगा कि किसी खास समुदाय या वर्ग के वोटर्स तो निशाना नहीं बन रहे हैं। हालांकि प्रशासन ने प्रतिबद्धता जताई है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से न हटे। नागरिकों से अपील भी की गई है कि वे अपना नाम जुड़वाने के लिए दिए गए समय में संबंधित फॉर्म भरें। सही स्थिति तो सारी प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद जारी की जाने वाली फाइनल सूची से होगी।
ठाकरे के पश्चिम नागपुर क्षेत्र में तो 40।21 वोटर्स के नाम सूची से बाहर हैं। बीते चुनाव में उन्हें 1,04,144 वोट मिले थे। वहीं भाजपा के सुधाकर कोहले ने 98,320 वोट हासिल किये थे। ठाकरे की जीत का अंतर सिर्फ 5,824 वोट्स का था। एसआईआर के पहले चरण सूची से इस सीट के कुल 3,99,371 मतदाताओं में से 1,60,571 वोटर्स गायब हैं। कांग्रेसी खेमे को यह भय है कि कहीं क्षेत्र के मुस्लिम वोट बैंक तो इससे प्रभावित नहीं हुए हैं। सूची का वह अध्ययन कर रही है।
ऐसा ही हाल कांग्रेस विधायक नितिन राऊत के उत्तर नागपुर क्षेत्र का भी है। यहां दलित वोटर्स का बाहुल्य है जो कांग्रेस के वोट बैंक समझा जाता है। इस क्षेत्र में सर्वाधिक 1,65,485 मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो गए हैं। पिछले चुनाव में राऊत को 1,27,877 वोट मिले थे और उन्होंने भाजपा के मिलिंद माने को 28,467 वोटों के अंतर से हराया था। निश्चित रूप से 1।65 लाख वोटर्स के नाम बाहर होना किसी भी चुनाव के परिणाम को प्रभावित कर सकता है।
मध्य नागपुर क्षेत्र में कांग्रेस हमेशा बीजेपी के लिए चुनौती खड़ी करती रही है। यहां अल्पसंख्यक मतदाता चुनाव परिणाम बदलने का माद्दा रखते हैं। यहां कुल 3,45,953 में से 1,31,508 मतदाताओं यानी 38।01 प्रतिशत के नाम सूची से बाहर हो गए हैं। बीते चुनाव में भाजपा के प्रवीण दटके ने 90,560 वोट लेकर कांग्रेस के बंटी शेलके को 11,632 वोट से हराया था। इतनी बड़ी संख्या में नाम हटने के बाद राजनीतिक दलों में आगामी 1 महीने में अपने वोटरों के अधिक से अधिक नाम जुड़वाने की होड़ देखने को मिल सकती है क्योंकि इससे हर चुनाव का प्रभावित होना तो तय है।
एसआईआर में सहयोग के लिए भाजपा ने ही सर्वाधिक बीएलए को काम पर लगाया था। प्रशिक्षण शिविर आयोजित किये थे। प्रक्रिया में सहभागिता भी निभाई थी, बावजूद इसके बीजेपी की चारों सीटों पर भी 37-38 फीसदी वोटर्स के नाम सूची से बाहर हो गए है।
वह भी इसका कारण तलाश रही है। विधायक मोहन मते के दक्षिण नागपुर क्षेत्र में 1,53,223 वोटर्स छूट गए हैं। मते ने बीते चुनाव में कांग्रेस के गिरीश पांडव को 15,658 वोटों से हराया था। उन्हें 1,17,526 वोट मिले थे, जबकि पांडव ने 1,01,868 वोट हासिल किये थे। उम्मीदवारों को जितने वोट मिले थे उससे कहीं अधिक वोटर्स तो सूची से बाहर हो गए है।
सर्वाधिक लीड से विस चुनाव जीतने वाले भाजपा विधायक कृष्णा खोपड़े के पूर्व नागपुर विस क्षेत्र में भी 4।32 लाख कुल वोटर्स में से 1,57,886 मतदाता सूची से गायब हो गए हैं जो उनके लिए भी चिंता का विषय है। खोपडे ने बीते चुनाव में 1,63,390 वोट लिए थे, जबकि राकां एसपी के उम्मीदवार दुनेश्वर पेठे 48, 102 वोट ही हासिल कर पाये थे। खोपड़े की जीत का अंतर 1,15,288 वोट का था।