अवैध पंजीयन, ट्रक घोटाला,(साेर्स: एआई फोटो) 
नागपुर

नागपुर RTO में फर्जीवाड़ा: 400 ट्रकों के परमिट रद्द, 8 हजार वाहनों की जांच शुरू; खुल रहीं रैकेट की परतें

Nagpur RTO Fake Documents: नागपुर ग्रामीण आरटीओ में 1,500 से 2,000 चोरी के ट्रकों के अवैध पंजीयन का खुलासा हुआ है। अब तक 400 परमिट रद्द किए जा चुके हैं और 8,000 ट्रकों के दस्तावेजों की जांच जारी है।

अंकिता पटेल

Nagpur RTO Truck Registration Scam: नागपुर ग्रामीण क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में पिछले कुछ वर्षों के दौरान करीब 1,500 से 2,000 चोरी के ट्रकों का अवैध रूप से पंजीयन किए जाने का खुलासा हुआ है। ग्रामीण आरटीओ के प्रादेशिक परिवहन अधिकारी विजय सिंह चव्हाण ने यह जानकारी दी। मामले का खुलासा होने के बाद अब तक 400 ट्रकों के परमिट रद्द किए जा चुके हैं, जबकि जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।

आरटीओ के अनुसार, करीब 8,000 ट्रकों के पंजीयन और दस्तावेजों की जांच के लिए सभी प्रमुख ट्रक निर्माता कंपनियों को पत्र भेजकर जानकारी मांगी गई है। दस्तावेजों का मिलान कर संदिग्ध वाहनों की पहचान की जा रही है। ज्ञात हो कि गुरुवार को ग्रामीण आरटीओ चोरी के 4 ट्रकों का रजिस्ट्रेशन कराये जाने का मामला सामने आया था।

नागपुर ग्रामीण आरटीओ कार्यालय के मोटर वाहन निरीक्षक होमेश चंद्रकांत काले की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। पश्चात जांच का दायरा बढ़ाया गया। अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार को कपिलनगर थाने में 5वां मामला दर्ज किया गया। वहीं सूत्रों ने यह संदेह जताया है कि इस रैकेट में आरटीओ के कर्मचारियों और दलालों का समावेश हो सकता है।

AP, MP, नगालैंड तक जुड़े हैं तार

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अरुणाचल प्रदेश (एपी), मध्य प्रदेश (एमपी) और नगालैंड तक इस रैकेट के तार जुड़े हुए है। अधिकारियों ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड में ट्रकों के भौतिक सत्यापन की अनिवार्यता नहीं होने का फायदा उठाकर चोरी के ट्रकों का पहले वहां पंजीयन कराया गया।

इसके बाद इन वाहनों को स्थानांतरण की प्रक्रिया के जरिए नागपुर ग्रामीण आरटीओं में दर्ज करा दिया गया। इस पूरे मामले में नागपुर के कपिलनगर पुलिस थाने में प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस और परिवहन विभाग संयुक्त रूप से मामले की जांच कर रहे हैं।

मैनुअल RC का फायदा उठाकर फर्जीवाड़ा

आरटीओ अधिकारियों के अनुसार ट्रकों का फर्जी रजिस्ट्रेशन कराने के लिए पहले इंजन और चेसिस नंबर बदल दिया जाता है। पश्चात इन ट्रकों को अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड जैसे राज्यों में ले जाया जाता है जहां ऑनलाइन पोर्टल की सुविधा उपलब्ध न हो। ऐसे में राज्यों में मैन्युअल रूप से वाहनों की आरसी बनाई जाती है। इस कारण ऑफलाइन रजिस्टर्ड वाहनों का कोई रिकॉर्ड नहीं होता। मैन्युअल आरसी का फायदा उठाकर इस पूरे फर्जीवाड़ा का अंजाम दिया जा रहा है।

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