Nagpur Mental Health Care: नागपुर जिले में मानसिक बीमारी के चलते अपने घर, गांव और शहरों से भटकने वाले मरीजों को स्वस्थ होने के बाद उनके परिजनों तक पहुंचाने में प्रादेशिक मनोरुग्णालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसी क्रम में तीन मरीजों को उनके परिजनों के सुपुर्द किया गया। नांदेड़ जिले की 56 वर्षीय महिला पिछले 21 वर्षों से अपने परिवार से दूर थी। वहीं अहिल्या नगर जिले की एक महिला भी 19 वर्षों बाद अपने घर पहुंची। तीसरी महिला 9 वर्षों से लापता थी।
जब प्रादेशिक मनोरुग्णालय की टीम नांदेड के गांव पहुंची तो परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू बह निकले। वहीं अहिल्या नगर की रहने वाली भी घर पहुंची। वह लंबे अर्से बाद अपनी बेटी को देखकर खुशी से रो पड़ी। करीब दो दशक बाद हुए इस मिलन ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। तीसरी महिला करीब 9 वर्षों से लापता थी।
बाद में उसका मनोरुग्णालय में इलाज किया गया। इन महिलाओं के पुनर्मिलन के लिए महीनों तक प्रयास किये गये। समाज सेवा अधीक्षक कुंदा काटेखाये-बिडकर ने संबंधित महिलाओं के मूल पते और परिवारों की तलाश के लिए लगातार प्रयास किए, इस दौरान पुलिस से सतत संपर्क किया जाता रहा। इस पूरी प्रक्रिया में नर्स संजया गणवीर, रुमा मालपे, सुशीला गायकवाड़ और प्रतीक्षा भुते ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रादेशिक मनोचिकित्सालय द्वारा मई में 5 महिला मनोरोगियों का पारिवारिक पुनर्मिलन कराया गया था। एक महिला का तेलंगाना में अंतरराज्यीय संस्थागत पुनर्वास भी किया गया था।
प्रादेशिक मनोरुग्णालय के अधीक्षक डॉ. अमरीश मोहबे ने बताया कि मानसिक बीमारी से ठीक होने के बाद दोबारा परिवार और समाज से जोड़ना ही उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पुनर्मिलन केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति को उसकी पहचान, अपनापन और सम्मान वापस दिलाने का मानवीय प्रयास है।