गड्ढों से बेहाल नागपुर सोर्स- सोशल मीडिया
नागपुर

15 दिन में उखड़ रहीं सड़कें, फिर भी 1.49 करोड़ की नई मशीन मंजूर! नागपुर मनपा में गड्ढा भरने के नाम पर खेल

Nagpur Pothole Repair: नागपुर में गड्ढों से निपटने में मनपा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। अब 1.49 करोड़ की रोड पैचर मशीन से मरम्मत होगी, जबकि 15 दिन में सड़कें फिर उखड़ने का आरोप है।

अंकिता पटेल

Nagpur Pothole Repair Machine: नागपुर शहर की सड़कों की दुर्दशा और मरम्मत के नाम पर चल रहे करोड़ों के खेल का आलम यह है कि तमाम प्रयासों के बावजूद सिटी में डामर की सड़कों पर गड्डों से निपटने में मनपा विफल है।

अब तक गड्डों से निपटने के लिए एक ओर जहां आवश्यक मजदूर और कर्मचारियों की उपलब्धता को मंजूरी प्रदान की गई वहीं कुछ मशीनों की खरीदी को भी हरी झंडी दी गई है। इसी क्रम में शुक्रवार को पीएसटी टेक्नोलॉजी इन्स्टा रोड पैचर मशीन से काम कराने के लिए 1.49 करोड़ के कार्य को स्थायी समिति की बैठक में मंजूरी प्रदान की गई। स्थायी समिति के कुछ सदस्यों का ही मानना है कि महानगर पालिका द्वारा सड़कों के गड्डे भरने का काम केवल दिखावा साबित हो रहा है क्योंकि मरम्मत के मात्र 15 दिन बाद ही सड़के फिर से उखड़ जाती हैं।

करोड़ों के अपग्रेडेशन के बावजूद सड़कें बेहाल

उल्लेखनीय है कि प्रशासन ने हॉट मिक्स प्लांट के अपग्रेडेशन पर भारी भरकम राशि खर्च की है और जेट पैच तथा इंस्टा पैच जैसी आधुनिक तकनीकों के काम के लिए डेढ़ से दो करोड़ रुपये दिए गए हैं, इसके बावजूद जीरी माइल, मेयर बंगला, सीताबर्डी मुंजे चौक से विजय टॉकीज रोड और कांग्रेस नगर-धंतोली जैसे प्रमुख मार्गों पर गड्ढे भरने का काम 15 दिन भी नहीं टिक पाता है।

ठेकेदारों के बिल बढ़ाने के लिए व्यवस्थित काम से इनकार

दानी ने कहा कि सड़कों की मरम्मत के लिए एक व्यवस्थित योजना का प्रस्ताव रखा गया था, जिसमें सोमवार से शुक्रवार तक शिकायतें एकत्रित करके उन्हें लोकेशन और जोन के अनुसार बांटकर मरम्मत करने का सुझाव रखा गया।

इस तकनीक के इस्तेमाल से एक ही सड़क की सभी शिकायतें एक साथ हल हो सकती थीं और लोगों को राहत मिलती लेकिन इस पारदर्शी योजना को लागू करने में प्रशासन एवं संबंधित विभाग ने असमर्थता जताई है। कुछ सदस्यों का मानना है कि इसके पीछे का मुख्य कारण यह है कि अगर ठेकेदार और मजदूर एक व्यवस्थित योजना के तहत एक ही दिन में एक सड़क के कई गड्ढे भर देंगे तो उनका काम जल्दी खत्म हो जाएगा और उनके भारी-भरकम बिल नहीं बन पाएंगे। ठेकेदार जानबूझकर काम को लटकाते हैं ताकि उनका आर्थिक नुकसान न हो।

त्योहारों के नाम पर महज खानापूर्ति

प्रशासन ने 26 तारीख को ईद और आगामी गणपति उत्सव से पहले प्राथमिकता के आधार पर कुछ विशेष क्षेत्रों के गड्ढे भरने की योजना बनाई है लेकिन अधिकारियों पर यह आरोप है कि जब उन पर दबाव बढ़ता है तो वे दिखावे के लिए दो-चार छोटे कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर देते हैं जबकि असल भ्रष्ट व्यवस्था जस की तस बनी रहती है।

यह पूरी स्थिति स्पष्ट करती है कि महानगर पालिका के पास संसाधन और आधुनिक मशीनें होने के बावजूद ठेकेदारों के मुनाफे और कमीशनखोरी के कारण शहर की जनता को खराब सड़‌कों का दंश झेलना पड़ रहा है।

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