नागपुर, पंकज भोयर, नवभारत एजुकेशन समिट,(फोटो सोर्स-सोशल मीडिया) 
नागपुर

नवभारत एजुकेशन समिट-2026: सरकारी स्कूलों की दशा बदलने के लिए सरकार, शिक्षक व पालकों का साथ आना जरूरी-पंकज भोयर

Nagpur Navbharat Education Summit: नागपुर में आयोजित नवभारत एजुकेशन समिट-2026 में मंत्री पंकज भोयर ने कहा कि नागपुर अब AIIMS, IIM और अन्य राष्ट्रीय संस्थानों के कारण नई पहचान बना रहा है।

अंकिता पटेल

Government School Infrastructure Navbharat Education: नागपुर गृह (ग्रामीण), गृह निर्माण, शालेय शिक्षण, सहकार और खनिकर्म राज्य मंत्री पंकज भोयर ने कहा कि पहले संतरे के रूप में पहचाने जाने वाला नागपुर आज एम्स, आईआईएम, एनसीआई सहित विविध प्रोजेक्टों के माध्यम से अपनी नई पहचान बना रहा है। देश के सेंटर में होने के कारण इसका काफी ज्यादा महत्व है।

वहीं राज्य के सरकारी स्कूलों की दशा को बदलने के लिए सभी को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। सरकार इसके लिए कई तरह से काम कर रही है, लेकिन इसके इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव तभी आयेगा, जब सरकार के साथ शिक्षक और पालक साथ आएंगे।

वे रामदासपेठ स्थित होटल सेंटर प्वाइंट में आयोजित 'नवभारत एजुकेशन समिट-2026' में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर विशेष अतिथि आईआईएम नागपुर के डायरेक्टर डॉ। भीमराया मेत्री, विभागीय शिक्षण उपसंचालक डॉ। माधुरी सावरकर व नवभारत के समूह संपादक संजय तिवारी प्रमुखता से उपस्थित रहे।

10,000 टीचर्स को देंगे एआई का प्रशिक्षण

उन्होंने कार्यक्रम में आये शिक्षकों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि राज्य सरकार ने करीब 10,000 शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक में प्रशिक्षित करने के लिए गूगल फॉर एजुकेशन के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इससे शिक्षकों को आधुनिक तकनीक से लैस करना और स्कूलों में एआई आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना है।

आने वाले समय में एआई से काफी बदलाव आयेगा। इसके अलावा स्कूली शिक्षा के स्तर को वैश्विक मानकों तक ले जाने और शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस एंड असेसमेंट इंडिया के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है।

नेता हिल जाते हैं, लेकिन अधिकारी नहीं

भोयर ने कहा कि तहसील, जिला और राज्य स्तर पर बच्चे जो विज्ञान प्रदर्शनी में अपने प्रोजेक्ट तैयार करते हैं, उन्हें देखकर लगता है कि इन्हें यदि अवसर मिले तो ये बच्चे फ्यूचर के साइंटिस्ट बनेंगे, ऐसे बच्चों को ऊर्जा देने का काम हमारा है। हमने ऐसे बच्चों के लिए पुरस्कार की राशि बढ़ाकर 1 लाख रुपये का प्रावधान भी किया था, लेकिन इसमें अधिकारियों की भूमिका बहुत ही अलग तरह की रहती है। एक बार नेता हिल जाता है, लेकिन अधिकारी नहीं हिलता। इसके चलते आज यह राशि अभी 51 हजार है। हर वर्ष 51 छात्रों को अमेरिका के नासा का दौरा कराया जायेगा।

550 आइडियल शिक्षकों का किया चयन

भोयर ने कहा कि हमारा प्रयास है कि शिक्षकों को टीचिंग के अलावा अतिरिक्त काम कम से कम दिये जाएं, ताकि शिक्षकों का ध्यान बच्चों की पढ़ाई पर केंद्रित रहे, आज सरकारी स्कूलों में बच्चे कम होने के पीछे कई कारण हैं। सामान्य व्यक्ति भी चाहता है कि उनका बच्चा अच्छे स्कूल और कॉन्वेंट में पढ़े, लेकिन वहीं देखा जाये, तो हर पैरेंट चाहता है कि उनका बच्चा जीएमसी, शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में जाए, इसी तरह सरकारी स्कूलों में भी भेजने के लिए हम सभी को अपने स्तर पर कार्य करना होगा। पिछले 2 वर्षों से इस ओर सरकार विविध कार्य करते आ रही है।

सरकार ने राज्य के स्कूलों की गुणवत्ता को सुधारने के लिए 550 'आइडॉल टीचर्स' का चयन किया है, ताकि इन उत्कृष्ट शिक्षकों की विशेषज्ञता का उपयोग शिक्षण नीतियों और नवाचारों को लागू करने में किया जा सके। ये बाकी टीचर्स को ट्रेनिंग देंगे। सभी एक्सपर्ट्स जहां छात्रों के भविष्य को लेकर अपने विचार रखेंगे वहीं बच्चों को मार्गदर्शन करने के साथ ही उन्हें एक मंच प्रदान करेंगे।

इसके अलावा राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर और शिक्षण तकनीकों को बेहतर बनाने के उद्देश्य से 100 शिक्षकों को सिंगापुर भेजा था। वहां पर उन्होंने शिक्षा प्रणाली, अनुशासन और देशभक्ति को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की कार्यप्रणाली का अध्ययन किया था।

4,800 स्कूलों का किया जा रहा कायाकल्प

उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री ने पीएम श्री योजना के तहत देश भर के सरकारी स्कूलों को अपग्रेड करके उन्हें 'मॉडल स्कूल' के रूप में विकसित करना है, जहां नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जा सके।

ठीक इसी तरह हमारे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य में 'सीएमश्री स्कूल योजना' शुरू की है, जिसके तहत राज्य के लगभग 4,860 सरकारी स्कूलों का कायाकल्प किया जाएगा।

इस महत्वाकांक्षी पहल का मुख्य उद्देश्य राज्य के सरकारी स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना और आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं प्रदान करना है। चयनित स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी, साइंस पार्क और खेल सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। इससे हमारे बच्चों की जिंदगी बदलेगी और वे एक अच्छे वातावरण में मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ पढ़ेंगे।

तत्कालीन मुख्यमंत्री की 'माझी शाळा, सुंदर शाळा' अभियान शुरू किया था, जिसमें स्कूलों के टीचर्स और हेड मास्टरों ने सहभाग लिया। अच्छी व्यवस्था करने और स्कूलों को पुरस्कार देने के लिए 90 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

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