Nagpur District Court Cases: नागपुर जिला व सत्र न्यायालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में शनिवार को नागपुर जिले में लंबित और दाखिल पूर्व मामलों के निपटारे को लेकर नागरिकों का उत्स्फूर्त प्रतिसाद मिला। लोक अदालत में कुल 11,098 प्रकरणों का आपसी समझौते से निपटारा किया गया। इन मामलों में कुल 40.71 करोड़ रुपये की समझौता राशि तय हुई। वहीं कर्ज वसूली से जुड़े मामलों में 8.53 करोड़ रुपये की राशि वसूल की गई।
नागपुर जिला व सत्र न्यायालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में प्रलंबित 6,196 मामलों तथा दाखिल पूर्व 4,902 मामलों का आपसी सहमति से निपटारा किया गया। इनमें दीवानी मामले, भूमि अधिग्रहण, समझौता योग्य आपराधिक मामले, वैवाहिक विवाद, मोटर दुर्घटना प्रकरण, विद्युत अधिनियम, चेक बाउंस, श्रम विवाद, ऋण वसूली, ग्राहक शिकायत और सहकारी न्यायालय से जुड़े मामले शामिल थे।
जिला लोक अदालत का आयोजन महाराष्ट्र राज्य विधि सेवा प्राधिकरण, मुंबई के निर्देश पर नागपुर जिला न्यायालय के पालक न्यायमूर्ति अनिल किलोर और राज वाकोडे के मार्गदर्शन और प्रमुख जिला एवं सत्र न्यायाधीश एम। सलमान आजमी की देखरेख में किया गया, जिला विधि सेवा प्राधिकरण के सचिव प्रवीण एम। उन्हाले, न्यायिक अधिकारियों, पैनल सदस्यों, न्यायालयीन कर्मचारियों, विधि आयोजन को सफल बनाने में सहयोग स्वयंसेवकों तथा अधिवक्ताओं ने किया।
मोटर दुर्घटना दावा प्राधिकरण में लोक अदालत के दौरान कुल 16.78 करोड़ रुपये की समझौता राशि तय हुई। इसी दौरान एक पुराने मामले में मृतक के परिजनों को 75 लाख रुपये की मुआवजा राशि मंजूर की गई। मामला सीआरपीएफ में कार्यरत फलजीभाई सरदार पटेल की मृत्यु से जुड़ा था।
26 सितंबर 2019 को राष्ट्रीय महामार्ग क्रमांक 7 पर कनकटी शिवार, समुद्रपुर के पास सुबह चारपहिया वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने से उनकी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उनकी मां और भाई ने मोटर दुर्घटना दावा क्रमांक 121/2021 दायर किया था। जिला लोक अदालत में पैनल क्रमांक-2 के समक्ष सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों में समझौता हुआ और वारिसों को 75 लाख रुपये मंजूर किए गए।
लोक अदालत से पहले नागपुर जिले के सभी फौजदारी न्यायालयों में 7 से 11 सितंबर तक विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 256 और 258 तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की संबंधित धाराओं के तहत 9,452 निरस्त फौजदारी प्रकरणों का भी निपटारा किया गया।
लोक अदालत के लिए विभिन्न पैनल गठित किए गए थे। इनमे कार्यरत एवं सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों को पैनल प्रमुख तथा अधिवक्ताओं और विधि महाविद्यालय के विद्यार्थियों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया था।