IAS Officer Suspension: देश में जब भी किसी बड़े IAS अधिकारी के सस्पेंड होने की खबर आती है, तो लोगों के मन में एक सवाल जरूर उठता है। आखिर जिस अफसर के आदेश पर पूरा जिला चलता है, उसे हटाने की ताकत किसके पास होती है? क्या मुख्यमंत्री अपने स्तर पर किसी आईएएस को सस्पेंड कर सकते हैं या इसके लिए केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी होती है?
दरअसल, आईएएस अधिकारी राज्य में तैनात जरूर होते हैं, लेकिन वे ऑल इंडिया सर्विस का हिस्सा होते हैं। इसलिए उनके निलंबन और विभागीय कार्रवाई के लिए अलग नियम बनाए गए हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आईएएस अधिकारी को कौन सस्पेंड कर सकता है, राज्य और केंद्र सरकार की क्या भूमिका होती है और सस्पेंशन के दौरान अधिकारी के साथ क्या होता है।
IAS (Indian Administrative Service) अधिकारी देश की अखिल भारतीय सेवा (All India Service) है। भले ही कोई IAS अधिकारी किसी राज्य में तैनात होकर वहां प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाता हो, लेकिन उसकी नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और उसका कैडर नियंत्रण कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के पास होता है।
यही व्यवस्था IAS अधिकारियों को केंद्र और राज्य, दोनों स्तरों पर काम करने का अधिकार और अवसर देती है। वे जिला मजिस्ट्रेट (DM), सचिव, विभागाध्यक्ष से लेकर केंद्र सरकार में शीर्ष प्रशासनिक पद तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल सकते हैं।
जब कोई IAS अधिकारी राज्य कैडर में पदस्थ होता है, तो उसे निलंबित करने का प्राथमिक अधिकार राज्य सरकार के पास होता है। यदि किसी अधिकारी पर भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग या गंभीर लापरवाही के आरोप होते हैं, तो राज्य सरकार प्रशासनिक कार्रवाई के तहत उसे तत्काल सस्पेंड कर सकती है।
हालांकि, निलंबन की प्रक्रिया यहीं समाप्त नहीं होती। क्योंकि IAS अधिकारी अखिल भारतीय सेवा का हिस्सा होते हैं, इसलिए आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई में केंद्र सरकार (DoPT) और संबंधित नियमों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
ऑल इंडिया सर्विसेज (डिसिप्लिन एंड अपील) रूल्स, 1969 के अनुसार, यदि कोई राज्य सरकार किसी भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी को निलंबित करती है, तो उसे 30 दिनों के भीतर इसकी सूचना और रिपोर्ट कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को भेजनी होती है।
इसके बाद केंद्र सरकार पूरे मामले की समीक्षा करती है। यदि निलंबन उचित पाया जाता है, तो उसे आगे जारी रखा जा सकता है। वहीं, किसी गंभीर मामले में केंद्र सरकार भी नियमों के तहत सीधे IAS अधिकारी के खिलाफ निलंबन की सस्पेंड कर सकती है।
कुछ लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि क्या किसी भी IAS अधिकारी का निलंबन होने पर नौकरी खत्म हो जाती है, लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं होता। इस दौरान अधिकारी को जांच पूरी होने तक अस्थायी रूप से ड्यूटी से हटाया जाता है और वह कार्यालय में कार्य नहीं कर सकता।
निलंबन अवधि में अधिकारी को नियमों के अनुसार सब्सिस्टेंस अलाउंस (निर्वाह भत्ता) मिलता है, जो वेतन का निर्धारित हिस्सा होता है। साथ ही विभागीय जांच चलती है, जिसके आधार पर यह तय किया जाता है कि अधिकारी को बहाल किया जाएगा या उसके खिलाफ आगे अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।