नागपुर जिला परिषद (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
नागपुर

नागपुर में शुरू हुआ 'मिशन ZP': आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई, फैसले पर टिकी पार्टियों की नजरें

Nagpur Zilla Parishad Mission: नागपुर में 'मिशन जिला परिषद' शुरू! सुप्रीम कोर्ट में आज आरक्षण पर अहम सुनवाई। क्या कांग्रेस का किला ढहा पाएगी भाजपा? दलबदल और सियासी समीकरणों पर खास रिपोर्ट।

प्रिया जैस

Nagpur Politics: नगर परिषद, नगर पंचायत और महानगरपालिका चुनाव के बाद अब राज्य की उन 12 जिला परिषद व 125 पंचायत समितियों के चुनाव 5 फरवरी को होने वाले हैं जहां विविध प्रवर्ग के लिए आरक्षण 50 प्रतिशत की सीमा में है। लेकिन नागपुर सहित अन्य 20 जिला परिषदों व 241 पंचायत समितियों के चुनाव लटके हुए हैं क्योंकि यहां आरक्षण 50 प्रतिशत से ऊपर चले गए हैं।

आज यानी 21 जनवरी को इस संदर्भ में प्रकरणों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने वाली है। सभी की नजरें सुको के फैसले पर लगी हुई हैं। हालांकि समझा जा रहा है कि सुनवाई के बाद एकाध तारीख और दी जा सकती है क्योंकि डबल बेंच की जगह अब सुनवाई 3 जजों की बेंच में है, इसलिए नागपुर सहित शेष जिप के चुनाव कार्यक्रम कब घोषित होंगे यह तय नहीं है।

बावजूद इसके नागपुर जिले में सभी राजनीतिक दल चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं। दिल्ली, मुंबई सहित अधिकतर नप-नपं, महानगरपालिकाओं में कब्जा जमाने वाली सत्ताधारी पार्टी बीजेपी ने जिले में अब ‘मिशन जेडपी’ का नारा देते हुए कार्यकर्ताओं को काम पर लगा दिया है।

पूर्ण बहुमत के साथ कांग्रेस का कब्जा

बताते चलें कि नागपुर जिला परिषद में वर्ष 2019 के चुनाव में कांग्रेस ने सत्ताधारी भाजपा को बुरी तरह से पराजित करते हुए 58 सीटों वाली जेडपी में अकेले ही 32 सीटें जीती थीं। वह पूर्ण बहुमत से सत्ता पर काबिज हुई थी। संयुक्त राष्ट्रवादी पार्टी ने 8 सीटों पर जीत दर्ज की थी और कांग्रेस के साथ गठबंधन पर रही। भाजपा को महज 14 सीटों पर जीत मिली थी और सदन में वह काफी कमजोर रही।

कांग्रेस के ही कुछ नाराज सदस्यों ने जरूर बीजेपी का खुलेआम साथ दिया था। अब इस चुनाव में बीजेपी किसी भी सूरत में कब्जा जमाना चाहती है। वहीं कांग्रेस दोबारा सत्ता हासिल करने के लिए पूरी ताकत लगा रही है लेकिन जिस तरह नगर परिषद व पंचायत व राज्य भर में मनपा चुनावों में कांग्रेस की दुर्गति हुई है उससे लहर सत्ताधारी भाजपा की दिशा बहती नजर आ रही है।

हालांकि स्थानीय निकाय चुनावों में राज्य में जिस पार्टी की सरकार होती है उसे अप्रत्यक्ष लाभ मिलता ही है। फिर भाजपा तो साम-दाम-दंड-भेद की नीति अपनाते हुए सत्ता हासिल करने की कला में निपुण मानी जाती है। निश्चित रूप से जेडपी में कब्जा जमाने व आक्रामक होगी और कांग्रेस इस आक्रमण को कैसे हैंडल करती है उस पर परिणाम निर्भर रहेगा। कांग्रेस की टीम भी अपने नेता के साथ मिशन जेडपी के लिए जुट गई है।

नाराज कार्यकर्ता छोड़ेंगे साथ

विधानसभा चुनाव के समय कांग्रेस व राकां के गढ़ में सेंध लगाने के लिए बीजेपी ने वजनदार नेताओं के करीबी पदाधिकारियों को तोड़कर अपने साथ मिलाया था। अपने-अपने क्षेत्र में वजनदारी रखने वाले इन पदाधिकारियों के पलायन से कांग्रेस कमजोर हुई। पलायन करने वालों ने कांग्रेस नेताओं पर भेदभाव व तानाशाही के आरोप लगाए थे।

केवल एक-दो लोगों पर ही कृपा बरसाने और जमीनी स्तर पर कार्य करने वालों को हड़काने के आरोप भी लगाए गए थे। जिला परिषद में भी कांग्रेस के अनेक वजनदार कार्यकर्ता भाजपा या फिर एकनाथ शिंदे सेना के साथ जाने वाले हैं जिनमें एक तो वेकोलि से जुड़े मजदूर व कर्मचारी संगठन के बहुत बड़े पदाधिकारी रहे हैं।

ये पहले कांग्रेस से जिप सदस्य भी रह चुके हैं और सत्ताधारी भाजपा को भी विविध मुद्दों पर घेरकर काम करवा लिया करते थे। उमरेड, कामठी व हिंगना विस क्षेत्र के कुछ अनुभवी कार्यकर्ताओं को पाला बदल करते हुए देखे जाने की प्रबल संभावना है। इससे कांग्रेस को नुकसान पहुंच सकता है। बीजेपी ने जिले में अपने 2 जिलाध्यक्षों को काम पर लगा रखा है।

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