भाजपा नागपुर चुनाव (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
नागपुर

Nagpur: भाजपा बनाने जा रही इतिहास, 72 की उम्र में किस्मत आजमा रहीं मथरानी, किसका होगा पलड़ा भारी?

Maharashtra Local Body Elections: नागपुर चुनाव में प्रभाग-1 से 72 वर्षीय भाजपा प्रत्याशी प्रमिला मथरानी चर्चा में। जातीय समीकरण और कार्यकर्ताओं की नाराजगी के बीच फंसा मुकाबला।

प्रिया जैस

Maharashtra Politics: नागपुर महानगरपालिका के चुनाव में मतदान की घड़ियां करीब होने के साथ ही अब प्रचार में कई तरह की चर्चाओं ने जगह बना ली है। इसी तरह का एक मुद्दा इन दिनों उत्तर नागपुर के कुछ प्रभागों में गूंजता दिखाई दे रहा है। न केवल भाजपा बल्कि कांग्रेस के भीतर भी यह मुद्दा अब चर्चा का विषय बना हुआ है। बगीचों में सुबह की सैर के साथ इस मुद्दे पर कई लोग मजे लेते भी दिखाई दे रहे हैं।

यह मुद्दा प्रभाग-1 से दूसरी बार भाग्य आजमा रहीं भाजपा प्रत्याशी प्रमिला मथरानी का है। लोगों का मानना है कि संभवत: महानगरपालिका के चुनाव में यह पहला अवसर होगा जहां कोई 72 वर्षीय प्रत्याशी स्थानीय निकाय के चुनाव में भाग्य आजमा रहा हो। इसके माध्यम से भाजपा भी सबसे बुजुर्ग उम्मीदवार को पार्षद बनाने का इतिहास बनाने का प्रयास कर रही है किंतु पार्टी के भीतर अलग-अलग राय हैं।

जाति समीकरण के कारण लगा है दांव

राजनीतिक जानकारों की मानें तो भले ही सभी राजनीतिक दल जातिवाद का विरोध करते हों किंतु यह मान्य करना होगा कि लोकसभा चुनाव से लेकर स्थानीय स्तर के चुनाव में भी जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए ही टिकटों का वितरण होता है। यहां तक कि प्रभागों में जीत सुनिश्चित करने के लिए जातीय उपवर्गीकरण को भी ध्यान में रखा जाता है।

इसी तरह का मामला प्रभाग-1 में है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार सिंधी समाज में घोटकी और नान-घोटकी का मसला है। कांग्रेस ने प्रभाग-1 में सिंधी समाज के एक वर्ग को मैदान में उतारा है, जबकि भाजपा ने सिंधी समाज के 2 प्रत्याशियों को उतारा है।

दोनों प्रत्याशी अलग-अलग वर्ग से लिए गए जिससे भाजपा केवल कांग्रेस प्रत्याशी के वर्ग वाले समुदाय में सेंध लगा रही है। वहीं पूरे सिंधी समाज से वोट बटोरने का प्रयास कर रही है। एक गट्ठा मतदान पर ही नजरें रखते हुए भाजपा की ओर से यह रणनीति अपनाए जाने की चर्चाएं हैं।

दबंग नेता, पस्त कार्यकर्ता

राजनीतिक जानकारों के अनुसार भाजपा भले ही वोट बटोरने की रणनीति पर काम कर रही हो किंतु स्थानीय स्तर पर इस रणनीति से कार्यकर्ता नाराज हैं। पार्टी के ही कार्यकर्ताओं का मानना है कि हाल ही में भाजपा ने युवा को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है। दूसरी ओर 72 वर्ष से अधिक उम्र की महिला को स्थानीय स्तर पर टिकट दिया जा रहा है, जबकि पार्टी के पास कई युवा कार्यकर्ता उपलब्ध हैं।

दबी आवाज में कार्यकर्ता इस बात को कहने से नहीं हिचक रहे कि केवल दबंग नेता के चलते इस तरह का समीकरण प्रभाग में बैठाया गया है। पूरे प्रभाग पर एकछत्र राज रखने के लिए ही कुछ रबर स्टैंप के तौर पर प्रत्याशी दिए जाने की चर्चा है।

कितना चल पाएगा आम्बेडकर पार्क का मुद्दा?

जानकारों के अनुसार राजनीतिक दल कई मुद्दों को लेकर मतदाताओं को आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं। इन मुद्दों में एक अहम मुद्दा आम्बेडकर नेशनल पार्क का भी है जिसने प्रभाग-1 में खलबली मचा रखी है। इस मुद्दे को लेकर जहां भाजपा विकास और जनहित के मुद्दों का नारा देकर जीत सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल आम्बेडकर नेशनल पार्क के मुद्दे को भी उठा रहे हैं किंतु चुनाव प्रचार की इस बयार में आम्बेडकर पार्क का मुद्दा कितना चल पाएगा? यह मतदान के दिन ही उजागर होने का मत भी राजनीतिक जानकार उजागर कर रहे हैं।

65 के पहले ही मैदान छोड़ चुके कई पार्षद

जानकारी के अनुसार इसके पूर्व भी कई पार्षद ऐसे रहे हैं जिन्होंने 65 साल की उम्र तक मनपा की राजनीति में अपना लोहा मनवाया है। गैर भाजपाई के रूप में सरदार अटल बहादुर सिंह, महादेवराव भोरकर, हिम्मतराव सरायकर, विठू महाजन, हसन अली हैं।

इसी तरह से भाजपा की ओर से भी बापट और एकनाथ जोग जैसे पूर्व पार्षदों ने 65 वर्ष की उम्र तक स्थानीय राजनीतिक में सक्रियता दिखाई। किंतु किसी ने भी 70 वर्ष पार की पारी नहीं खेली थी। अब पहली बार 70 वर्ष से अधिक उम्र की प्रत्याशी चुनाव मैदान में डटी हुईं हैं।

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