नागपुर एमआईडीसी,(सोर्सः सोशल मीडिया)  
नागपुर

नागपुर MIDC का बड़ा कदम: बंद पड़े 39 औद्योगिक प्लॉट वापस लिए गए, मिलाप पोर्टल के जरिए नए उद्यमियों को मिलेंगे

MIDC Land Allocation: नागपुर संभाग में वर्षों से निष्क्रिय 39 औद्योगिक भूखंड वापस लेकर नए उद्यमियों को आवंटित किए जाएंगे। सरकार के इस फैसले से औद्योगिक निवेश और रोजगार को नई गति मिलने की उम्मीद है।

अंकिता पटेल

Nagpur MIDC Industrial Plots: नागपुर राज्य सरकार द्वारा नागपुर संभाग में वर्षों से निष्क्रय पड़े 39 औद्योगिक भूखंडों को वापस लेकर नए उद्यमियों को आवंटित करने का निर्णय स्वागत योग्य और समयोचित कदम है। इस पहल से औद्योगिक जगत में नई उम्मीद जगी है।

एमआईडीसी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष पी। मोहन के अनुसार महाराष्ट्र विधान परिषद में उद्योग मंत्री उदय सामंत ने जानकारी दी कि हिंगना एमआईडीसी के 9 और बूटीबोरी एमआईडीसी के 30 औद्योगिक भूखंड उन आवंटियों से वापस ले लिए गए हैं जिन्होंने उद्योग शुरू नहीं किए। इन भूखंडों को अब एमआईडीसी के 'मिलाप पोर्टल' पर नए उद्यमियों के लिए उपलब्ध कराया गया है।

बंद पड़ी हैं 153 औद्योगिक इकाइयां

सरकार ने यह भी बताया कि हिंगना और बूटीबोरी में 153 औद्योगिक इकाइयां बंद पड़ी हैं जिनके कब्जे में लगभग 270 एकड़ मूल्यवान औद्योगिक भूमि है। इसके अलावा नागपुर, वर्धा, भंडारा और गोंदिया में 301 आवंटित औद्योगिक भूखंडों पर उद्योग वित्तीय कठिनाइयों, कानूनी विवादों या अन्य कारणों से बंद या निष्क्रय हैं।

ऐसे भूखंड धारकों को नोटिस जारी किए गए हैंऔर उद्योग शुरू न होने की स्थिति में एमआईडीसी ने भूमि वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह साहसिक निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि सरकार औद्योगिक भूमि को एक बहुमूल्य सार्वजनिक संपत्ति मानती है, जिसे वर्षों तक बेकार नहीं छोड़ा जा सकता।

यह कदम एमआईडीसी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन की उस लंबे समय से मांग को भी सही ठहराता है जिसमें निर्षक्रय औद्योगिक भूखंडों को वापस लेकर उद्यमियों को देने की बात कही गई थी। हालांकि केवल 39 भूखंडों की वापसी को शुरुआत माना जाना चाहिए, विदर्भ क्षेत्र की औद्योगिक क्षमता को विकसित करने के लिए व्यापक अभियान की आवश्यकता है।

टालनी पड़ रहीं विस्तार की योजनाएं

पी। मोहन ने कहा कि आज हिंगना एमआईडीसी एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। नागपुर अपनी केंद्रीय भौगोलिक स्थिति, बेहतर सड़क, रेल और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी तथा सरकार की औद्योगिक विकास नीति के कारण तेजी से एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स और विनिर्माण केंद्र बन रहा है। निवेशकों की बढ़ती रुचि के बावजूद उद्योगों के विस्तार में सबसे बड़ी बाधा औद्योगिक भूमि की कथित कमी है।

लेकिन वास्तविकता यह है कि यह कमी काफी हद तक कृत्रिम है। जहां एक ओर विस्तार के इच्छुक उद्योगों को नई जमीन नहीं मिल रही, वहीं दूसरी ओर सैकड़ों एकड़ भूमि वर्षों से बंद पड़े उद्योगों के कब्जे में है।

अनेक सफल एमएसएमई अपने वर्तमान परिसर की क्षमता पूरी तरह उपयोग कर चुके हैं और नई उत्पादन लाइनें, आधुनिक तकनीक तथा रोजगार सृजन में निवेश करना चाहते हैं। लेकिन आसपास उपलब्ध औद्योगिक भूखंड न होने के कारण उन्हें विस्तार की योजनाएं टालनी पड़ रही हैं या फिर विदर्भ के बाहर निवेश करना पड़ रहा है।

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