

PWD Tender Scam Probe: पीडब्ल्यूडी क्रमांक-1 के अंतर्गत आने वाले महत्वपूर्ण शासकीय विश्रामगृहों रवि भवन, नाग भवन और हैदराबाद हाउस में फर्नीचर तथा अन्य निर्माण कार्यों में कथित घोटाले का मामला सामने आया है।
पश्चिम नागपुर के विधायक विकास ठाकरे द्वारा की गई शिकायत के बाद पीडब्ल्यूडी मंत्री शिवेंद्र सिंह राजे भोसले ने विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इन कार्यों के लिए जारी करोड़ों रुपये की निविदाओं में कथित अनियमितता, वित्तीय गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी।
ठाकरे ने शिकायत की थी कि नवंबर 2025 के शीतकालीन सत्र से पहले तथा फरवरी 2026 के दौरान कार्यों को जानबूझकर छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर कुछ विशेष ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया गया। प्रतिस्पर्धा से बचने, अन्य ठेकेदारों को निविदा की जानकारी न मिलने देने तथा सरकारी खजाने को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से कथित मिलीभगत के साथ यह प्रक्रिया अपनाई गई।
आरोप है कि इन कार्यों के लिए 3 लाख रुपये की सीमा से नीचे जानबूझकर सैकड़ों निविदाएं जारी की गई। मात्र 3 दिनों में निविदाएं आमंत्रित की गई और प्रकाशित होने के केवल 5 दिन के भीतर ही वर्कऑर्डर जारी कर दिए गए।
इतना ही नहीं, कुछ कार्य किए बिना ही संबंधित ठेकेदारों के नाम पर बिल बनाकर भुगतान भी कर दिया गया। ठाकरे ने संबंधित वर्कऑर्डर की प्रतियां भी मंत्री को सौंपी हैं। पीडब्ल्यूडी क्रमांक-1 के अंतर्गत रवि भवन, नाग भवन, हैदराबाद हाउस तथा अन्य शासकीय इमारतों के लिए ये निविदाएं जारी की गई थीं।
इनमें लकड़ी की फ्लोरिंग, फर्नीचर, सिविल मरम्मत, प्लंबिंग, बोलार्ड लगाने सहित विभिन्न कार्य शामिल थे। आरोप है कि रवि भवन में लगभग 1 करोड़ रुपये की लकड़ी की फ्लोरिंग का एकीकृत कार्य कराने के बजाय उसे जानबूझकर 35 अलग-अलग निविदाओं में विभाजित किया गया, प्रत्येक निविदा का मूल्य लगभग 3 लाख रुपये से कम रखकर कुछ ठेकेदारों को लाभपहुंचाने के उद्देश्य से निविदा प्रक्रिया अपनाई गई।
विधायक विकास ठाकरे ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक संबंधित अभियंताओं को निलंबित रखा जाए, इसके साथ ही पिछले 7 वर्षों के सभी प्रशासनिक अनुमोदनों, अनुमान पत्रों, निविदा प्रक्रिया, कायर्यादिशों, माप पुस्तिकाओं, भुगतान तथा गुणवत्ता जांच रिपोर्ट का स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय ऑडिट कराया जाए। उन्होंने प्रत्येक कार्य का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन कराने तथा दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने की मांग की है।