हाई कोर्ट (सोर्स- सोशल मीडिया) 
नागपुर

हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: तीसरे पक्ष की शिकायत पर नहीं होगी स्कूलों में दखलंदाजी, अधिकारियों पर लगाया जुर्माना

Nagpur High Court: हाई कोर्ट ने तीसरे पक्ष की शिकायत पर स्कूल के अनुदान को रोकने वाले आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने शिक्षा उपसंचालक, शिक्षा अधिकारी और शिकायतकर्ता पर 10-10 हजार का जुर्माना लगाया।

रूपम सिंह

Nagpur High Court Education Department: शिक्षा विभाग के आदेशों को चुनौती देते हुए 'ज्ञानेश्वर माउली विद्यालय' और 'मनोहर नाईक जूनियर कॉलेज' के कर्मचारियों (दत्तात्रय कंवर और अन्य) तथा स्कूल प्रबंधन (जनता बहुउद्देशीय शिक्षण प्रसारक मंडल) की ओर से हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की गईं। इन पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों और एक आरटीआई (RTI) कार्यकर्ता को कड़ी फटकार लगाई।

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी अजनबी या तीसरे पक्ष की शिकायत के आधार पर किसी स्कूल या ट्रस्ट के मामलों में दखलंदाजी नहीं की जा सकती है। इसके साथ ही कोर्ट ने अमरावती डिवीजन के शिक्षा उपसंचालक, वाशिम के शिक्षा अधिकारी और शिकायतकर्ता पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधि। पुरुषोत्तम पाटिल ने पैरवी की।

रोक दिया 20 प्रतिशत अनुदान विस्तार

दरअसल एक रिटायर्ड बैंक मैनेजर और खुद को आरटीआई कार्यकर्ता बताने वाले प्रदीप प्रभाकरराव देशमुख ने इन शिक्षकों की नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं की शिकायत शिक्षा विभाग से की थी, जबकि उनका इस स्कूल या ट्रस्ट से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था।

इस शिकायत के आधार पर शिक्षा उपसंचालक ने बिना कोई उचित कारण बताओ नोटिस दिए और बिना सुनवाई का पर्याप्त मौका दिए 31 अक्टूबर 2023 को स्कूल के 20% अनुदान के विस्तार पर रोक लगा दी। हद तो तब हो गई जब यह मामला  नागपुर हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था लेकिन अदालत की जानकारी होने के बावजूद शिक्षा उपसंचालक ने जल्दबाजी में 12 दिसंबर 2023 को एक नया आदेश पारित कर एक कर्मचारी की नियुक्ति की मंजूरी ही रद्द कर दी।

केवल पीड़ित को कानूनी प्रक्रिया में दखल का अधिकार

कोर्ट ने कहा कि कोई भी अजनबी व्यक्ति किसी भी कानूनी प्रक्रिया में तब तक दखल नहीं दे सकता जब तक कि वह' पीड़ित व्यक्ति' की श्रेणी में न आता हो। कोई भी व्यक्ति जिसका कानूनी अधिकार या हित सीधे तौर पर प्रभावित न हो, वह ऐसी शिकायत नहीं कर सकता। न्यायालय ने 14 अक्टूबर 2019 और 18 फरवरी 2025 के राज्य सरकार

के परिपत्रों का उल्लेख करते हुए बताया कि इनमे स्पष्ट रूप से निर्देशित है कि किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा की गई शिकायत पर विचार नहीं किया जाना चाहिए जिसका उस विषय से कोई लेना-देना न हो। अधिकारियों के इस मनमाने रवैये और अदालत के संज्ञान में मामला होने के बावजूद जल्दबाजी में आदेश पारित करने को गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने 31 अक्टूबर 2023 और 12 दिसंबर 2023 के आदेशों को पूरी तरह रद्द कर दिया है।

समय रैना को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत, इंडियाज गॉट लेटेंट मामले में सभी FIR रद्द करने के दिए आदेश

चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर SC सख्त: केंद्र सरकार को जारी किया नोटिस, पूछा- क्यों नहीं हो रही पुलिस रिपोर्टिंग?

आज की ताजा खबर 14 अगस्त LIVE: जेपी नड्डा अस्पताल में भर्ती; चमोली लैंडस्लाइड हादसे में मृतकों की संख्या हुई 7

लाल किले से PM मोदी का मेगा शो: 80वें स्वतंत्रता दिवस का पूरा मिनट-टू-मिनट शेड्यूल जारी, जानें कब क्या होगा

Census 2027: सरकार ने जारी किया 40 सवालों का हाउसहोल्ड शेड्यूल, जानिए 17 अगस्त से कैसे करें सेल्फ-इन्यूमरेशन