हाई कोर्ट (फाइल फोटो) 
नागपुर

नागपुर में 3 हफ्ते के भीतर हटेंगे अवैध बूचड़खाने, NIT को मिला सख्त आदेश, हाई कोर्ट ने लगाई फटकार

Nagpur High Court Order NIT: हाई कोर्ट का सख्त आदेश। NIT की जमीन से 3 सप्ताह में हटेंगे अवैध बूचड़खाने। फर्जी दस्तावेज पेश करने वाले अतिक्रमणकारियों पर गिरेगी गाज। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

प्रिया जैस

Illegal Slaughterhouse Removal Nagpur: प्रन्यास की जमीन पर हुए अतिक्रमण के साथ ही निजी मालिकी की जमीन पर हुए अवैध निर्माण को हटाने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रन्यास की पैरवी कर रहे वकील ने सभी अतिक्रमणों को हटाने का आश्वासन दिया। इसके बाद न्यायाधीश अनिल पानसरे और न्यायाधीश निवेदिता मेहता ने अतिक्रमण में विशेषकर मांस/चिकन की दुकानें और बूचड़खाने, अगले 3 सप्ताह के भीतर हटाने का आदेश जारी किया।

सुनवाई के दौरान एनआईटी के वकील एसएम पुराणिक ने अदालत में बयान दिया कि एनआईटी की जमीन पर हुए अतिक्रमण को आज से 3 सप्ताह के भीतर हटा दिया जाएगा। अदालत ने इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए एनआईटी को कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। वहीं याचिकाकर्ता की निजी जमीन पर हुए अतिक्रमण के मामले में हाई कोर्ट ने उन्हें अपनी शिकायत के निवारण के लिए उपयुक्त फोरम का दरवाजा खटखटाने की छूट प्रदान की।

अतिक्रमणकारियों पर फर्जी दस्तावेज पेश करने का आरोप

इस मामले में सुनवाई के दौरान एक बड़ा मोड़ तब आया जब संपत्ति पर कब्जा जमाए बैठे प्रतिवादियों की पैरवी कर रहे वकील अधिवक्ता एसडी चांदे ने दावा किया कि उनके मुवक्किल पिछले 40 वर्षों से इस संपत्ति पर काबिज हैं। जब अदालत ने उनसे मालिकाना हक साबित करने वाले दस्तावेज मांगे तो वे कोई वैध दस्तावेज नहीं दिखा सके।

इसकी बजाय उन्होंने 1975 के एक नियमित दीवानी मुकदमे (सूट नंबर 177/1975) की डिक्री का हवाला दिया जिसमें जमीन का स्पष्ट विवरण भी मौजूद नहीं था। इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि प्रतिवादियों द्वारा जिस डिक्री का हवाला दिया जा रहा है वह असल में ‘सर्वोदय गृह निर्माण सोसाइटी’ द्वारा दायर एक अन्य मुकदमे (सूट नंबर 285/1975) की है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि अतिक्रमणकारियों ने अदालत में फर्जी दस्तावेज का सहारा लिया है।

मृत व्यक्ति को भेजा गया नोटिस रद्द

हाई कोर्ट ने इस धोखाधड़ी के आरोप को गंभीरता से लेते हुए अगली सुनवाई को इस पर संज्ञान लेने के संकेत दिए जिसमें प्रतिवादियों द्वारा पेश किए गए इन विवादित दस्तावेजों की जांच की जाएगी। इसी मामले से जुड़े एक अन्य सिविल आवेदन (777/2026) पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने एनआईटी द्वारा 24 मार्च 2026 को शामराव दुर्गाजी भांगे और अन्य को जारी किए गए एक नोटिस को भी रद्द कर दिया।

याचिकाकर्ता ने मृत्यु प्रमाणपत्र पेश करते हुए बताया कि शामराव का बहुत पहले निधन हो चुका है। याचिकाकर्ता द्वारा दी गई दलीलों पर एनआईटी ने विवाद नहीं किया जिसके बाद हाई कोर्ट ने नोटिस को खारिज करते हुए एनआईटी को आवश्यकता पड़ने पर कानून के अनुसार नया नोटिस जारी करने की अनुमति दी।

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