MSEDCL AI Power Theft Action: नागपुर में बिजली चोरी के खिलाफ कार्रवाई को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए महावितरण ने अब 'एआई' की 'सुपर इंटेलिजेंस' का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।
महाराष्ट्र राज्य भर में 190 से अधिक विशेष उड़न दस्तों द्वारा बिजली कनेक्शनों की जांच और 'एआई' मॉड्यूल के सूक्ष्म विश्लेषण के माध्यम से पिछले 3 महीनों में 66.28 करोड़ रुपये से अधिक की चोरी का पर्दाफाश हुआ है। अब तक बिजली चोरी और समझौता शुल्क की राशि जमा नहीं करने वाले 289 मामलों में आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।
महावितरण से मिली जानकारी के अनुसार, एआई और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करते हुए बिजली चोरी की सटीक भविष्यवाणी करने वाला मॉड्यूल तैयार किया गया है। बिजली ग्राहकों या संबंधित क्षेत्र में बिजली खपत के पुराने आंकड़ों अचानक कम या अधिक हुई मांग, मीटर में तकनीकी छेड़छाड़ और 50 से अधिक अन्य तकनीकी मानकों का यह मॉड्यूल 24 घंटे सूक्ष्म विश्लेषण कर रहा है।
जिन ग्राहकों के बिजली उपयोग में संदिग्ध अंतर पाया जाता है, उन्हें यह 'एआई' मॉड्यूल 'हाई रिस्क' श्रेणी में डाल देता है। इससे बिना किसी पूर्व जांच के बिजली चोरी होने वाले स्थान की सटीक जानकारी मॉड्यूल के माध्यम से उपलब्ध हो रही है।
महाराष्ट्र राज्य भर में बिजली चोरी के खिलाफ कार्रवाई में कहीं भी लापरवाही न हो, इसके लिए बिजली कनेक्शन की जांच से लेकर बिजली बिल तैयार करने तक की पूरी प्रक्रिया 'थेफ्ट ट्रैकिंग एंड मॉनिटरिंग सिस्टम' के माध्यम से पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है। इसके लिए एक स्वतंत्र मोबाइल एप भी विकसित किया गया है।
महाराष्ट्र राज्य भर में पिछले जून से अगस्त तक 3 महीनों में महावितरण के नियमित और विशेष दस्तों ने छत्रपति संभाजीनगर क्षेत्रीय विभाग में 5,083, कोंकण में 11,083, नागपुर में 5,949 और पुणे क्षेत्रीय विभाग में 5,849, इस प्रकार कुल 27,964 बिजली चोरी के मामले उजागर किए है।